उत्तर-पूर्वी चीन के ज्यूफ़ोतांग निक्षेप में लगभग 120 मिलियन वर्ष पहले एक छोटा जीव रहता था, जो जाहिर तौर पर आधुनिक प्लैटिपस से कम नहीं तैर सकता था। चीनी जीवाश्म-विज्ञानियों ने Dongoconodon platycauda नाम की एक नई प्रजाति का वर्णन किया है — एक आरंभिक सच्चा स्तनधारी, जिसके अवशेषों में लक्षणों का एक दुर्लभ संयोजन सुरक्षित रहा है।
2016 में मिले कंकाल का कंप्यूटर टोमोग्राफी की सहायता से अध्ययन किया गया। पता चला कि इस जीव के पंजे चौड़े थे और उनकी उँगलियों की हड्डियाँ चपटी थीं, जो प्लैटिपस के जालयुक्त अंगों जैसी लगती थीं, और इसकी पूँछ कोणीय थी, जो न्यूट्रिया की पूँछ जैसी प्रतीत होती थी। संभवतः यह जीव अपने अगले पंजों से चप्पू चलाता था और पूँछ से गति की दिशा नियंत्रित करता था। हड्डियों के अनुपात की तुलना 124 आधुनिक प्रजातियों के आँकड़ों से करने पर अर्ध-जलीय जीवनशैली की पुष्टि हुई।
सबसे बड़ी अप्रत्याशित बात दंत-प्रणाली थी। अधिकांश स्तनधारी दाँत एक बार बदलते हैं — दूध के दाँतों के स्थान पर स्थायी दाँत आते हैं। यहाँ तो पहले से निकल चुके और बन रहे प्रतिस्थापी दाँतों के नीचे तीसरी पीढ़ी की इनेमल टोपी पाई गई। तीन समूहों के चिह्न सभी प्रकार के दाँतों में दिखाई देते हैं: कृंतक, रदनक, अग्रचर्वणक और दाढ़-सदृश दाँतों में। ऐसी परिघटना किसी भी जीवित या विलुप्त स्तनधारी में ज्ञात नहीं है।
इसके अलावा, जीवाश्म में मध्य कान की एक संक्रमणकालीन संरचना सुरक्षित रही: अस्थिकृत मेकल उपास्थि अभी भी निचले जबड़े को श्रवण-यंत्र की हड्डियों से जोड़े हुए थी। आधुनिक स्तनधारियों में ये तत्व पूरी तरह अलग हो चुके हैं। यह खोज दर्शाती है कि विकास-क्रम में यह विभाजन कैसे हुआ।
यह खोज बताती है कि स्तनधारियों का आरंभिक विकास आम धारणा से कहीं अधिक लचीला था: प्रमुख लक्षण — दाँतों का बदलना, कान की बनावट, पर्यावरण के अनुकूलन — जरूरी नहीं कि एक साथ विकसित हुए हों। एक ही जीवाश्म ने एक साथ कई «नवाचारों» को समेट लिया।
ऐसी खोजें याद दिलाती हैं कि आधुनिक समूहों के उदय से बहुत पहले जल के अनुकूलन के रास्ते कितने विविध हो सकते थे।


