नदी की बाम मछलियों (विशेष रूप से यूरोपीय और अमेरिकी प्रजातियों) का प्रजनन जीव विज्ञान की सबसे अद्भुत और लंबे समय तक रहस्य बनी रहने वाली प्रक्रियाओं में से एक है। 19वीं शताब्दी के अंत तक, वैज्ञानिक यह समझ नहीं पाए थे कि ये मछलियाँ कहाँ से आती हैं, क्योंकि नदियों में कभी किसी ने इनके अंडे या लार्वा नहीं देखे थे। उदाहरण के लिए, अरस्तू का मानना था कि वे कीचड़ से पैदा होती हैं।
यहाँ बताया गया है कि यह प्रक्रिया वास्तव में चरण-दर-चरण कैसे होती है:
1. यात्रा की तैयारी (कायाकल्प)
बाम मछलियाँ अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा (5-15 साल या उससे अधिक) यूरोप या अमेरिका के ताजे पानी (नदियों, झीलों) में बिताती हैं। जब उनके प्रजनन का समय आता है, तो इन मछलियों में कुछ अद्भुत शारीरिक बदलाव होते हैं:

* वे भोजन करना बंद कर देती हैं।
* उनका रंग पीले-हरे (पीला पेट) से बदलकर चांदी जैसा (पेट सफेद और पीठ गहरी) हो जाता है।

* समुद्र की गहराइयों के अंधेरे में बेहतर ढंग से देखने के लिए उनकी आँखें आकार में बड़ी हो जाती हैं।
* उनकी पाचन प्रणाली सिकुड़ जाती है, जबकि प्रजनन ग्रंथियाँ तेजी से विकसित होने लगती हैं।
ऐसी बाम मछलियों को सिल्वर ईल कहा जाता है।
2. महाप्रवास
सिल्वर ईल नदियों से निकलकर समुद्र में चली जाती हैं और हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा पर निकल पड़ती हैं।
यूरोपीय बाम मछलियाँ सारगासो सागर (बरमूडा और वेस्ट इंडीज के बीच अटलांटिक महासागर का एक क्षेत्र, जो अपनी समुद्री घास के लिए प्रसिद्ध है) की ओर तैरती हैं।

* इस यात्रा को पूरा करने में लगभग 6-8 महीने का समय लगता है।
3. प्रजनन (स्पॉनिंग)
यह पूरी प्रक्रिया का सबसे गुप्त चरण है। बाम मछलियाँ सारगासो सागर में बहुत अधिक गहराई (लगभग 400-700 मीटर, और कुछ आंकड़ों के अनुसार 1500 मीटर तक) पर एकत्रित होती हैं।
* वहाँ वे अंडे देती हैं और शुक्राणु छोड़ती हैं।
* महत्वपूर्ण तथ्य: प्रजनन के बाद सभी वयस्क बाम मछलियाँ मर जाती हैं। वे अपने पूरे जीवनकाल में केवल एक ही बार प्रजनन करती हैं।
4. लार्वा अवस्था (लेप्टोसेफली)
अंडों से ऐसे लार्वा निकलते हैं, जो वयस्क बाम मछलियों से बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं।
इन्हें लेप्टोसेफली कहा जाता है।
* वे पारदर्शी, चपटे और आकार में विलो के पत्ते जैसे होते हैं।
* उनमें लाल रक्त कोशिकाएं नहीं होती हैं और वे समुद्री बर्फ (जैविक अवशेषों) पर जीवित रहते हैं।
ये लार्वा सक्रिय रूप से नहीं तैरते, बल्कि गल्फ स्ट्रीम की धाराओं के साथ यूरोप की ओर बहते हैं। यह बहाव 1 से 3 साल तक चलता है। इस अवधि के दौरान वे बढ़कर कुछ सेंटीमीटर के हो जाते हैं।
5. वापसी (ग्लास ईल)
यूरोप के तटों के करीब पहुँचते ही, लार्वा एक नए रूपांतरण से गुजरता है:
वह शरीर से संकीर्ण और बेलनाकार हो जाता है, लेकिन फिर भी पारदर्शी ही रहता है। अब इसे ग्लास ईल कहा जाता है।
* वे नदियों के मुहानों में प्रवेश करती हैं और धारा के विपरीत दिशा में आगे बढ़ने लगती हैं।
6. वयस्क होना (येलो ईल)
नदी के बहाव के विपरीत ऊपर की ओर बढ़ते हुए, बाम मछलियाँ रंग (पीठ गहरी और पेट हल्का) प्राप्त कर लेती हैं और येलो ईल में बदल जाती हैं। इस अवस्था में वे कई वर्षों तक रहती हैं, विकसित होती हैं और आहार लेती हैं, जब तक कि यह चक्र फिर से शुरू न हो जाए।
संक्षिप्त सारांश: बाम मछलियाँ खारे पानी (सारगासो सागर) में जन्म लेती हैं, मीठे पानी (यूरोप की नदियों) में बड़ी होती हैं, और अगली पीढ़ी को जीवन देने तथा स्वयं मरने के लिए फिर से महासागर में लौट जाती हैं।



