1973 में दक्षिण-पूर्वी पेरू के मानु राष्ट्रीय उद्यान में काम करने वाले वनस्पतिशास्त्री रॉबिन फ़ोस्टर को एक छोटा-सा पेड़ मिला, जिसके चमकीले नारंगी फल काग़ज़ी चीनी लालटेन जैसे लगते थे। नमूने इकट्ठा करने के बाद उन्होंने पौधे का कुल निर्धारित करने की कोशिश की, पर सफल नहीं हुए: पत्तियाँ, फूल और फल मानो अलग-अलग समूहों के थे और किसी जानी-पहचानी तस्वीर में नहीं बैठते थे। फ़ोस्टर मानते थे कि अधिकांश पौधों का कुल पहली नज़र में ही बता दिया जाता है, पर यह मामला अपवाद निकला।
माशिगेंगा जनजाति के स्थानीय लोग इस पौधे को बहुत पहले से जानते थे और रोज़मर्रा के जीवन में उसका उपयोग करते थे। विज्ञान के लिए यह पेड़ लगभग आधी सदी तक रहस्य बना रहा। सूखे नमूने हर्बेरियम में पड़े रहे, फ़ोस्टर ने जिन साथियों को वे दिखाए, वे कुल का नाम भी नहीं बता सके, और सूखी सामग्री से डीएनए निकालने की कोशिशें बेकार गईं।
मोड़ तब आया जब मानु में काम करने वाली शोधकर्ता पैट्रिसिया अल्वारेस-लोयोज़ा ने 2015 में फ़ील्ड संग्रहालय को पौधे का ताज़ा नमूना भेजा। डीएनए विश्लेषण से पता चला कि पेड़ के निकटतम संबंधी Picramniaceae कुल के हैं, हालाँकि देखने में यह अपने संबंधियों से लगभग मिलता ही नहीं था।
निर्णायक साबित हुआ केवल 2–3 मिलीमीटर लंबे नन्हे फूलों का बारीक़ी से अध्ययन। न्यूयॉर्क वानस्पतिक उद्यान के इस कुल के विशेषज्ञ वेट थॉमस और उनके साथियों ने आणविक आँकड़ों की तुलना आकारिकी से की और निष्कर्ष निकाला कि यह एक अलग वंश और प्रजाति है। इस तरह Aenigmanu alvareziae अस्तित्व में आया: «Aenigmanu» नाम का अर्थ है «मानु का रहस्य», और प्रजाति-नाम अल्वारेस-लोयोज़ा को अमर करता है, जिनके बिना आनुवंशिक विश्लेषण के लिए नमूना न मिल पाता। विवरण Taxon पत्रिका में 6 अक्टूबर 2021 को प्रकाशित हुआ, यानी समाधान में लगभग पचास वर्ष लगे।
यह पेड़ लगभग छह मीटर तक बढ़ता है और नम उष्णकटिबंधीय वन की अधःस्तर वनस्पति में उगता है। यह पेरू और ब्राज़ील के Acre राज्य में पाया जाता है। मुख्य समस्या है पर्यावास: यह प्रजाति निचले वनों के एक दुर्लभ प्रकार से जुड़ी है, जिनमें पानी लगभग नहीं भरता। ऐसे क्षेत्र कटाई और जलवायु परिवर्तन के कारण तेज़ी से घट रहे हैं, इसलिए शोधकर्ता सुझाव देते हैं कि इस प्रजाति को संकटग्रस्त श्रेणी में रखा जाए।
वैज्ञानिक नाम केवल वर्गीकरण के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। आधिकारिक विवरण जीवन-वृक्ष में प्रजाति का स्थान सुनिश्चित करता है और संरक्षण के लिए एक ठोस वस्तु देता है: अब ठीक-ठीक बताया जा सकता है कि वन के कौन-से हिस्से बचाने हैं। इसीलिए शोध-पत्र के लेखक नामकरण को संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम मानते हैं।
व्यावहारिक रुचि भी है। फल मीठे और मलाईदार स्वाद के हैं, पर मनुष्य को उन्हें नहीं खाना चाहिए: यह पौधा खाद्य संसाधन नहीं बनेगा। पर Picramniaceae से संबंध होना एक और दिशा खोलता है। इस काम में शामिल न रहे ब्रिटिश वर्गीकरण-विज्ञानी मार्टिन चिक ने कहा कि इस कुल में अक्सर ऐसे यौगिक मिलते हैं जो कैंसर-रोधी दवाओं के निर्माण में काम आ सकते हैं, और अब नई प्रजाति के गुणों की खोज ठीक इसी दिशा में करनी चाहिए।
इस पेड़ की कहानी दिखाती है कि उष्णकटिबंधीय वनों में कितना कुछ अज्ञात छिपा है। स्वयं फ़ोस्टर इस बात पर ज़ोर देते हैं कि पौधों का अध्ययन कम हुआ है, विशेषकर ऊपरी अमेज़ोनिया के पौधों का, जबकि इसी क्षेत्र की सभी पारिस्थितिकियों की नींव वही हैं। उष्णकटिबंध में हो रहे बदलावों को समझने और जो बचा है उसकी रक्षा करने के लिए पहले यह जानना ज़रूरी है कि वहाँ क्या उगता है।
