सितंबर के मध्य में ग्वांगडोंग प्रांत के लियानजियांग के दलदली इलाकों में पक्षी-निरीक्षकों ने एक साथ छह रंगीन आइबिस दर्ज किए — जो राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित पहली श्रेणी की प्रजाति है। पक्षी-प्रेमियों के स्थानीय संगठन के लिए यह एक ही भ्रमण में अब तक का सर्वाधिक आँकड़ा बन गया। अपने पंखों की विशिष्ट धात्विक आभा वाले ये पक्षी उथले पानी में शांति से चारा खाते रहे और एक जगह से दूसरी जगह उड़ते रहे, जो उनकी अच्छी स्थिति दर्शाता है।
रंगीन आइबिस (Plegadis falcinellus) आइबिस कुल का मध्यम आकार का पक्षी है, जिसके पंख धूप में कांस्य, हरे और बैंगनी रंगों की छटा बिखेरते हैं। पहले उपयुक्त दलदलों के घटने और प्रदूषण के कारण यह प्रजाति चीन में दुर्लभ अतिथि मानी जाती थी। अब, निरीक्षण के आँकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में उसका परिचित भोजन-आधार धीरे-धीरे बहाल हो रहा है: धान के खेतों और तटीय लैगूनों में छोटे अकशेरुकी, कीट-लार्वे और क्रस्टेशियन। एक ही स्थान पर एक साथ छह व्यक्तियों का दिखना बताता है कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र अभी इस भार को सँभाल रहा है।
ग्वांगडोंग के दलदली क्षेत्र पूर्वी एशिया के अनेक जल-पक्षियों के प्रवास मार्गों की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यहाँ वे लंबी उड़ानों से पहले विश्राम करते हैं और वसा का भंडार भरते हैं। जब ऐसे क्षेत्र सुरक्षित रहते हैं और उन पर निर्माण नहीं होता, तो दुर्लभ प्रजातियों के सफल प्रजनन और जीवित रहने की संभावनाएँ बढ़ती हैं। एक ही फ़्रेम में छह आइबिस केवल एक सुंदर तस्वीर नहीं है, बल्कि इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वेटलैंड्स के छोटे-छोटे हिस्सों की रक्षा भी ठोस परिणाम देती है।
झानजियांग में पक्षी-प्रेमियों का संगठन फरवरी से नियमित निगरानी कर रहा है, जब उसी क्षेत्र में पहले पक्षी देखे गए थे। कुछ महीनों बाद दोगुनी या तिगुनी संख्या में पक्षियों से दोबारा मुलाकात यह अनुमान लगाने की गुंजाइश देती है कि यह क्षेत्र केवल अस्थायी पड़ाव नहीं, बल्कि ऐसा स्थान भी है जहाँ पक्षी स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं। ऐसे निरीक्षण प्रमुख आवासों की सीमाओं को स्पष्ट करने और उनकी सुरक्षा के उपायों को दुरुस्त करने में मदद करते हैं।
प्रकृति के ऐसे कोनों के संरक्षण के लिए केवल निर्माण पर रोक ही नहीं, बल्कि पानी की गुणवत्ता पर नियंत्रण और आसपास के कृषि क्षेत्रों का विवेकपूर्ण उपयोग भी आवश्यक है। जब स्थानीय निवासी और स्वयंसेवक हर मुलाकात को देखते और दर्ज करते हैं, तो इससे समष्टि की स्थिति की जीवंत तस्वीर बनती है और संरक्षण के अधिक सटीक निर्णयों के लिए आधार मिलता है।

