कैसे Claude और अन्य AI उपकरण वेब डिज़ाइन पर एक ही तरह की 'बेज' एकरूपता थोप रहे हैं

द्वारा संपादित: Irena II

I don’t have any fancy benchmarks other than: I don’t know how you see Claude or ChatGPT design the same way and write the same way and believe that it’s intelligent in any real way. If there was “intelligence” in there, it would be like “oh yeah I totally track what you’re

Kyle Chayka
Kyle Chayka
@chaykak

Beige backgrounds, rust-red text, overzealous italics and underlining, pointless news tickers — I wrote about the increasingly annoying generic style of Claude Design websites and AI-induced homogeneity for my @NewYorker column

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Claude Design की मदद से बनी वेबसाइटें अब एक जैसी दिखने लगी हैं: क्रीम और बेज रंग के बैकग्राउंड, रस्ट-ऑरेंज शेड्स, और इटैलिक के साथ बड़े सेरिफ़ फोंट जिनमें ज़्यादा ट्रैकिंग होती है। यह सौंदर्यशास्त्र अब एक पहचाने जाने वाले घिसे-पिटे अंदाज़ में बदल गया है, ठीक उसी तरह जैसे AI के लिखने की आदतें होती हैं—जैसे डैश का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल या 'X नहीं बल्कि Y' वाली बनावट।

विडंबना यह है कि जो टूल्स रचनात्मकता को रफ़्तार देने के लिए बनाए गए थे, वे इसके बजाय एक औसत दर्जे की पसंद को बढ़ावा दे रहे हैं। ये मॉडल पहले से मौजूद वेबसाइटों के विशाल डेटा पर प्रशिक्षित होते हैं और उस 'सुरक्षित' विकल्प को चुनते हैं जो ज़्यादातर यूज़र्स को ठीक लगे। जब तक कोई डिज़ाइनर खुद सचेत होकर इसका विरोध न करे, तब तक नतीजे अंततः एक सामान्य स्तर पर सिमट कर रह जाते हैं।

यह उसी प्रवृत्ति का विस्तार है जो एल्गोरिदम के दौर में शुरू हुई थी। सोशल मीडिया के सुझावों की तरह, जहाँ कंटेंट को ज़्यादा से ज़्यादा पहुँच के हिसाब से ढाला जाता था, अब AI औद्योगिक स्तर पर और पलक झपकते ही यह एकरूपता पैदा कर रहा है। बेज कलर पैलेट और नियॉन चमक वाले गोल कोनों वाले कार्ड अब पूरे इंटरनेट पर पोर्टफोलियो, लैंडिंग पेज और डैशबोर्ड में नज़र आने लगे हैं।

डिज़ाइनरों का मानना है कि जो लोग पहले वॉर्म टोन और रेट्रो फोंट पसंद करते थे, वे भी अब सहज रूप से इनसे दूर भाग रहे हैं। जो चीज़ अपने आप में अच्छी लग सकती थी, वह अब हर जगह दिखने के कारण एक बोरियत भरी घिसी-पिटी चीज़ बन गई है। यूज़र को फौरन महसूस हो जाता है कि उनके सामने कोई अनोखा समाधान नहीं, बल्कि AI मॉडल द्वारा तैयार किया गया एक सांचा है।

इसकी एक सरल तुलना ऐसे की जा सकती है कि जैसे दुनिया के सभी रसोइये इंटरनेट की सबसे लोकप्रिय रेसिपी के अनुसार खाना बनाने लगें। वह व्यंजन सुरक्षित और खाने लायक तो होगा, लेकिन अपनी पहचान पूरी तरह खो देगा। वेब डिज़ाइन में इसका अर्थ यह है कि मौलिकता के लिए अब सचेत प्रयास करने और मॉडल को औसत दर्जे की सीमाओं से बाहर धकेलने की ज़रूरत है।

सवाल यह नहीं है कि क्या इस बनावट से पूरी तरह बचा जा सकता है, बल्कि यह है कि इसे कहाँ इस्तेमाल करना सही है। किसी साधारण पोर्टफोलियो या कॉर्पोरेट वेबसाइट के लिए शायद यह ठीक हो। लेकिन उन प्रोजेक्ट्स के लिए जहाँ विशिष्टता और सांस्कृतिक संदर्भ मायने रखते हैं, यह कतई उचित नहीं है। डिज़ाइन की समझ रखने वाला कोई भी व्यक्ति तुरंत मशीन की छाप को पहचान लेता है और उसका भरोसा कम हो जाता है।

अंततः, इस तरह की एकरूपता का बढ़ना सुविधा की कीमत पर सवाल उठाता है: हम इंटरफ़ेस बनाने की गति के लिए अपनी दृश्य संस्कृति की विविधता का कितना बलिदान देने को तैयार हैं?

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स्रोतों

  • The generic style of AI web design

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