विज्ञान अकादमी के चीनी वैज्ञानिकों ने रसायन विज्ञान की तीन खोजों की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जिन्होंने दुनिया भर की प्रयोगशालाओं को पहले ही बदल दिया है, लेकिन अभी तक उन्हें सर्वोच्च सम्मान — नोबेल पुरस्कार — नहीं मिला है। बात नई पीढ़ी के डीएनए अनुक्रमण, पेरोव्स्काइट-आधारित उन्नत सौर सेलों और कार्बन-नाइट्रोजन बंधों के निर्माण के उत्प्रेरण की हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये कार्य चिकित्सा, ऊर्जा और औषधि विज्ञान में आधुनिक शोध का आधार हैं।
नई पीढ़ी के डीएनए अनुक्रमण ने जीनोम पढ़ने को एक श्रमसाध्य प्रक्रिया से एक सुलभ उपकरण में बदल दिया। इस विधि का आधार न्यूक्लियोटाइडों का रासायनिक संशोधन है: वे एक प्रतिदीप्ति चिह्न और एक अस्थायी अवरोधक वहन करते हैं, जो शृंखला की वृद्धि को रोकता है। क्षारकों को बारी-बारी जोड़ना, संकेत की तस्वीर लेना और चिह्न को हटाना — इससे लाखों खंडों को एक साथ पढ़ना संभव हो जाता है। इसके कारण दुर्लभ रोगों का निदान, कैंसर का अध्ययन और विषाणुओं के उत्परिवर्तनों पर नज़र रखना सामान्य काम बन गया है।
दूसरा उम्मीदवार पेरोव्स्काइट पर आधारित सौर सेल हैं। विशेष क्रिस्टल संरचना वाली ये सामग्रियाँ सौर स्पेक्ट्रम के विभिन्न भागों के अनुरूप आसानी से ढाली जा सकती हैं। परतों को सिलिकॉन के साथ टंडेम सेलों में जोड़ा जा सकता है, जिससे समग्र दक्षता बढ़ती है। निम्न तापमान पर विलयनों से उत्पादन करने से लागत घटने की उम्मीद है, हालाँकि खुली हवा में स्थिरता इंजीनियरों के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
तीसी दिशा कार्बन-नाइट्रोजन बंधों के निर्माण की अभिक्रियाएँ हैं, जिन्हें बुखवाल्ड-हार्टविग ऐमिनीकरण के नाम से जाना जाता है। पैलेडियम उत्प्रेरक सुगंधित वलयों पर नाइट्रोजनयुक्त समूहों को विश्वसनीय रूप से जोड़ने में सक्षम बनाते हैं। ऐसे बंध अधिकांश आधुनिक औषधियों में मिलते हैं, और इस विधि ने औषधि विज्ञान के लिए नए अणुओं के संश्लेषण की संभावनाओं को काफी विस्तार दिया है।
इन तीनों खोजों में एक बात समान है: इनका जन्म रसायन विज्ञान के अन्य विज्ञानों के साथ संगम पर हुआ और ये पहले ही अपरिहार्य उपकरण बन चुकी हैं। चीनी शोधकर्ता इस बात पर ज़ोर देते हैं कि जीनोमिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और औषधि निर्माण में सफलताएँ मूलभूत रासायनिक समाधानों से ही संभव हुई हैं। अब यह देखना बाकी है कि इन कार्यों को बहुप्रतीक्षित मान्यता मिलती है या नहीं।
