कार्लोस अल्काराज़ कुछ भी हल्के में नहीं लेना चाहते थे। साढ़े चार महीने बिना टूर्नामेंट के बिताने के बाद वह कोर्ट पर लौटे और अपने दूसरे ही एकल टूर्नामेंट में ट्रॉफी उठा ली — टोक्यो में जापान ओपन। फाइनल में इस स्पेनिश खिलाड़ी ने चेक गणराज्य के इर्जी लेहेच्का को 7-6(4), 6-4 से हराया और खिताब बचाया, पीट सैम्प्रास के बाद पहले ऐसे खिलाड़ी बन गए जिसने यह कारनामा लगातार दो साल किया।
कलाई की चोट ने अल्काराज़ को अप्रैल से अगस्त के अंत तक खेल से बाहर कर दिया। वह रोलां गैरो और विंबलडन से चूक गए, और केवल यूएस ओपन में लौटे, जहाँ वह क्वार्टरफाइनल तक पहुँचे। टोक्यो में भी उन्होंने पूरे सप्ताह आदर्श टेनिस नहीं दिखाया, लेकिन निर्णायक क्षणों में समाधान निकाल लिए। फाइनल में लेहेच्का 3-1 से आगे थे, पर अल्काराज़ ने वापसी की और टाई-ब्रेक में लगातार पाँच अंक जीतकर बाजी मार ली।
यह जीत उनके लिए सीज़न का तीसरा खिताब बनी — ऑस्ट्रेलियन ओपन और फरवरी के कतर ओपन के बाद। यह 27वीं ट्रॉफी है 23 वर्षीय स्पेनिश खिलाड़ी के करियर की। उल्लेखनीय है कि यह सफलता उस घोषणा से कुछ ही घंटे पहले मिली जिसमें यानिक सिनर ने घुटने की समस्या के कारण सीज़न जल्दी समाप्त करने की बात कही। विश्व टेनिस के दो अग्रणी खिलाड़ी चोट की रेखा के आर-पार निकले।
अल्काराज़ ने खुद माना था: उन्हें नहीं पता था कि वह इतनी जल्दी जीत की राह पर लौट पाएँगे या नहीं। मैच के बाद उन्होंने कहा, "मैं कुछ भी हल्के में नहीं लेना चाहता था। मुझे नहीं पता था कि इस सीज़न में कोई टूर्नामेंट जीत पाऊँगा या नहीं। मैं बस आता हूँ, अपना सब कुछ लगाता हूँ और देखता हूँ कि क्या होता है।" ये शब्द इस पल का मूल सार उजागर करते हैं: टेनिस के प्रतिभाशाली खिलाड़ी के लिए भी लंबे विराम के बाद वापसी कोई स्वतः होने वाली प्रक्रिया नहीं, बल्कि संदेहों और शरीर पर रोज़ाना किया जाने वाला काम है।
एक वायलिन वादक की कल्पना कीजिए, जो उँगली टूटने के बाद फिर से वाद्य यंत्र उठाता है। पहले स्वर आदर्श नहीं लगते, लेकिन उसे अब पता है कि तारों से ठीक उसी समय गाना कैसे निकलवाना है जब ज़रूरत हो। टोक्यो में अल्काराज़ बिल्कुल इसी तरह खेले: हमेशा सुंदर नहीं, पर ठीक ज़रूरी क्षणों में सटीक। फाइनल में पहली सर्विस पर उनके 85 प्रतिशत जीते गए अंक कोई संयोग नहीं, बल्कि अनुकूलन की क्षमता का परिणाम थे।
यह खिताब केवल आँकड़ा नहीं है। यह दिखाता है कि आधुनिक टेनिस में प्रभुत्व की प्रकृति कैसे बदल रही है: सीज़न की शुरुआत में आदर्श फॉर्म से ज़्यादा सहनशक्ति और मानसिक दृढ़ता महत्वपूर्ण होती जा रही है। अल्काराज़ पहले ही एटीपी फाइनल्स के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं और शंघाई की तैयारी कर रहे हैं। अब सवाल यह नहीं है कि वह शिखर पर लौटेंगे या नहीं, बल्कि यह है कि हर जीत को नए सिरे से सराहना सीखकर वह कितनी दूर तक जा सकते हैं।
