पेरिस के रनवे पर सेंट लॉरेंट (Saint Laurent) का नया पुरुषों का कलेक्शन 1980 के दशक की आर्काइवल ऊर्जा से भरा हुआ है: जैकेट से लेकर फिटिंग वाले निटवियर तक, लगभग हर परिधान में कंधों की बनावट को उभारा गया है। डिज़ाइनर एंथनी वेकैरेलो (Anthony Vaccarello) न केवल इस बारीकी को पुनर्जीवित कर रहे हैं, बल्कि इसे अपने सिलुएट (silhouette) का मुख्य आधार बना रहे हैं।
मध्यम आकार से लेकर लगभग नाटकीय स्वरूप तक — हर विकल्प एक सोची-समझी पसंद के रूप में दिखाई देता है। यहाँ तक कि बिना आस्तीन वाले वेस्ट (vests) में भी कंधे ही आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
साल 2016 से, वेकैरेलो लगातार सेंट लॉरेंट में 1980 के दशक के 'पावर-ड्रेसिंग' सौंदर्य को पिरो रहे हैं, जो कैथरीन डेनेउवे और डेविड बोवी अभिनीत फिल्म 'द हंगर' (निर्देशक टोनी स्कॉट, 1983) से प्रेरित है, जहाँ ग्लैमरस सादगी ही स्टाइल का मुख्य आधार थी। उनके कलेक्शंस में शोल्डर पैड्स का इस्तेमाल महज़ पुरानी यादें ताज़ा करना नहीं है, बल्कि यह 2010 के दशक के मिनिमलिज्म और ओवरसाइज ट्रेंड्स का एक आधुनिक जवाब है। मजबूत कंधे अब आत्मविश्वास के एक नए प्रतीक के रूप में वापस आ रहे हैं।
वेकैरेलो हर नए कलेक्शन के साथ फैशन हाउस की भाषा को और भी स्पष्ट कर रहे हैं और अपने द्वारा चुने गए मार्ग को और गहरा बना रहे हैं। पेरिस शो में सजावटी तामझाम के बजाय बारीकियों पर ज़ोर दिया गया: कास्टिंग और स्टाइलिंग में खास तौर पर कंधों की रेखा पर ध्यान केंद्रित किया गया — मॉडल्स इस तरह से रैंप वॉक कर रहे थे कि कपड़ों की रूपरेखा (silhouette) पूरी तरह स्पष्ट दिखाई दे।
यह इस बात की पुष्टि है कि सेंट लॉरेंट इस स्टाइल को अपनी सिग्नेचर पहचान (DNA) के रूप में बनाए हुए है। पिछले दस वर्षों से फैशन हाउस का नेतृत्व कर रहे क्रिएटिव डायरेक्टर के लिए, इस तरह के निरंतर प्रयास पुरुषों के फैशन की प्रतिस्पर्धी दुनिया में एक विशिष्ट पहचान बनाने का एक तरीका हैं।
सांस्कृतिक संदर्भ इस ट्रेंड के महत्व को और बढ़ा देते हैं: ताकत और संवेदनशीलता के बीच धुंधली होती सीमाओं के इस दौर में, कपड़े आत्मविश्वास और नियंत्रण हासिल करने का एक त्वरित जरिया प्रदान करते हैं। इसके लिए जिम में घंटों बिताने की ज़रूरत नहीं है — बस एक सही फिटिंग वाला जैकेट ही काफी है।
चौड़े कंधों वाले जैकेट में एक पुरुष अधिक संगठित और सक्रिय दिखाई देता है। इससे शारीरिक मुद्रा (posture) सुधरती है और लोगों के देखने का नज़रिया बदल जाता है। यह खास तौर पर उस पीढ़ी के लिए प्रासंगिक है जो बेपरवाह (casual) स्टाइल में पली-बढ़ी है, लेकिन अब कपड़ों के माध्यम से आत्म-अभिव्यक्ति और विशिष्टता की तलाश कर रही है।
समय ही बताएगा कि यह ट्रेंड रनवे से बाहर कितना लोकप्रिय होता है और रोज़मर्रा के पहनावे के साथ-साथ अन्य फैशन हाउस के कलेक्शंस में इसकी क्या भूमिका होगी।



