अंताल्या प्रांत के अद्रासन तट पर, जलमग्न पुरातत्वविदों ने भूमध्य सागर की तलहटी से हज़ारों मिट्टी के बर्तन निकाले हैं, जो वहाँ दो हज़ार से अधिक वर्षों से पड़े थे। इस खोज में 122 विभिन्न आकार की प्लेटें, कटोरे और ट्रे शामिल हैं — यह सब उस माल का हिस्सा था, जो ज़ाहिर तौर पर रोम की ओर जा रहा था।
जहाज़ लगभग पहली शताब्दी ईसा पूर्व के मध्य में डूबा था। मुख्य माल — आधुनिक हाताय प्रांत के क्षेत्र में स्थित प्राचीन बस्ती र्होसस की भोजन-पात्र थीं। ऐसी वस्तुएँ रोमन संसार में प्रतिष्ठित मानी जाती थीं और गुणवत्ता तथा डिज़ाइन के लिए कीमती समझी जाती थीं। तुर्की के संस्कृति और पर्यटन मंत्री मेहमेत नूरी एर्सोय ने कहा कि आकारों की विविधता उस युग की शानदार दावतों की संस्कृति को उजागर करती है।
बर्तनों को लकड़ी के संदूकों में पैक किया गया था, और उनके बीच की जगह मिट्टी से भर दी गई थी। सुरक्षा का यह सरल उपाय कारगर साबित हुआ: बहुत-सी वस्तुएँ लगभग साबुत बची रहीं। जहाज़ पर मिले एंटिओक के सिक्के यात्रा की तिथि तय करने में मदद करते हैं और इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह जहाज़ उस समुद्री व्यापार-जाल का हिस्सा था, जो पूर्वी भूमध्य सागर को एजियन सागर, ग्रीस और इटली से जोड़ता था।
र्होसस का ज़िक्र सिसरो ने 50 ईसा पूर्व में एटिकस को लिखे एक पत्र में किया था — उसने वहाँ से बर्तन मँगाए थे। अब पुरातत्व उस बात का ठोस प्रमाण देता है कि इन वस्तुओं को वास्तव में समुद्र के पार लंबी दूरियों तक ले जाया जाता था। उसी माल में एजियन द्वीपों से आए एम्फोरा दिखाते हैं कि उस समय का वाणिज्य कितना जटिल और बहुस्तरीय था।
जल की गहराई 42 से 55 मीटर तक है, और रोबोटों का इस्तेमाल शोध को बिना जल्दबाज़ी के जारी रखने की सुविधा देते हैं। हर नया टुकड़ा प्राचीन अर्थव्यवस्था की तस्वीर में विवरण जोड़ता है, जहाँ पहली नज़र में साधारण दिखने वाले बर्तन भी प्रतिष्ठा की वस्तु और दूर-दूर तक ढुलाई का ज़रिया बन जाते थे।
ऐसी खोजें याद दिलाती हैं कि हर डूबे हुए जहाज़ के पीछे सिर्फ़ एक त्रासदी नहीं, बल्कि मानवीय संबंधों का पूरा तंत्र होता है: कारीगर, व्यापारी, उपभोक्ता, जो सुंदर चीज़ों को महत्व देते थे और उनके लिए कीमत चुकाने को तैयार थे। आधुनिक तकनीकें बस उन आवाज़ों को सुनने में मदद करती हैं, जो दो हज़ार साल पहले इन मार्गों पर चलते थे।

