❓प्रश्न:
आप जो जानकारी देते हैं, उसके साथ कैसे काम करें ताकि भौतिक संसार में परिणाम दिखे। सबसे महत्वपूर्ण क्या है? केवल समझना और विश्वास करना नहीं, बल्कि अनुभव करना? क्या-क्या गलतियाँ हो सकती हैं, किस बात पर ध्यान दें?...
❗️उत्तर lee:
पहला, हर शब्द पर संदेह करें।
दूसरा, अगर आपको कुछ समझ न आए — तो जो सुना उसके संदर्भ की जाँच करें — संभवतः आप उसकी व्याख्या उससे भिन्न कर रहे हैं जैसा प्रस्तुत किया गया था। 99% में लोग वह नहीं सुनते जो कहा गया था।
तीसरा, अपने लिए एक स्पष्ट आधार बनाएँ, जिसकी शुरुआत इस क्षण से हो «मैं हूँ और इसका अर्थ है…»। अगर यह आधार न हो, तो व्यक्ति अपने पुराने आत्म-निर्धारण पर नए अर्थ आरोपित कर देता है। इस अर्थ में «मैं एक ऐसा मनुष्य हूँ जो खतरनाक संसार में रहता है…» इस आत्म-निर्धारण पर «मैं वह हूँ जो अपनी वास्तविकता निर्धारित करता है» को उचित रूप से आरोपित नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, आपका पीछा सदा «हानिकारक खाद्य पदार्थ», «खतरनाक स्थान», «अप्रिय लोग»… करते रहेंगे।
चौथा, अपने जीवन में हर नए ज्ञान को एकीकृत करें। इसे «मैं कल इस पर सोचूँगा, क्योंकि आज मुझे अपनी समस्या सुलझानी है» पर न छोड़ें। आपकी वर्तमान समस्या ही आपकी नई चेतनाओं के प्रयोग का आदर्श बिंदु है।
पाँचवाँ, परिणाम कोई भौतिक परिवर्तन नहीं है, परिणाम आपका स्वयं का परिवर्तन है। जाँच सरल है — «मैं अनुभव करता हूँ कि मैं इस ओर भिन्न दृष्टि से देख रहा हूँ»। और तब «चमत्कार सक्रिय होता है» — समस्या स्वयं ही उस परिवर्तन-बिंदु से पहले की आपकी दृष्टि से भिन्न तरीके से लुप्त हो जाती है। उदाहरण के लिए, आपको कोई शोर करने वाला पड़ोसी परेशान करता था, और आप उससे छुटकारा पाने का सपना देखते थे — परिणाम — आपने नया फ्लैट खरीद लिया (हालाँकि «पुराने मैं» में आप ठीक पड़ोसी को ही «निष्क्रिय» करने का प्रयास कर रहे थे)।
इस प्रकार — परिणाम एक नए स्तर पर समाधान है, न कि पुराने उत्तेजक का उन्मूलन। यही चेतना सभी प्रक्रियाओं के लिए नई चेतनाओं की प्राप्ति की कुंजी है।
पुराने समाधानों को नए तरीकों से थोपना — यही शिकार की स्थिति पर आधारित मानव बुद्धि की मुख्य भूल है। «नई शराब पुरानी मशकों में नहीं डाली जाती» — इस विषय पर यह संदेश है, जिसका अर्थ है कि धारणा का नया स्तर नए दृष्टिकोण उत्पन्न करता है। उदाहरण के लिए, प्रचुरता का ज्ञान «बाहरी स्रोत से धन उगाहने» के प्रयासों पर उचित रूप से लागू नहीं होता। यह ज्ञान आपको नए स्रोत देता है। आप सूख चुके कुएँ को नहीं फैलाते, आपको एक उबलता झरना मिलता है।
लेकिन! झरना तब तक दिख ही नहीं सकता, जब तक आप ज़िद करके पुरानी जगह पर ही खोदते रहें और दूसरों पर यह आरोप लगाते रहें कि «तरीका काम नहीं करता»।
और यहाँ हम बिंदु №1, №2… पर लौटते हैं — दूसरों के शब्दों पर संदेह करें और स्वयं का अध्ययन करें। क्या आपने वाकई … के प्रति अपना दृष्टिकोण बदल लिया है?
🌕 - पूर्ण स्पष्टता!
🌖 - कुछ ऐसे क्षण शेष हैं जिन पर चेतना आवश्यक है!
🌓 - मैं समझने लगा हूँ!
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