स्वयं को खोजने के लिए आपको कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है।
❓ प्रश्न:
क्या मैं सही समझ रहा हूँ कि 'मैं हूँ' समाधि का तीसरा स्तर है, और इसके बावजूद आप कई अलग-अलग समस्याओं को सुलझाने के लिए इसका उपयोग करने का सुझाव दे रहे हैं? यह 'सब कुछ ठीक है' को पहचानने से लेकर, शरीर के साथ काम करने और उन विषयों को सुलझाने हेतु अभेद की भावना के लिए है जहाँ व्यक्ति स्वयं को विलग पाता है? मैं यह नहीं कह रहा कि यह अवस्था अप्राकृतिक है, लेकिन इसे पहचानने के लिए तैयारी या अभ्यास की आवश्यकता होती है, शायद आधुनिक जीवन में इस तरह के झुकाव की अपरिचितता के कारण — यह जेब में हाथ डालने जितना आसान काम नहीं है।
❗️ ली (lee) का उत्तर:
आपने बड़ी चतुराई से पूरी बात को ही पलट दिया है। 'मैं हूँ' वही है जिसे आप महसूस करते हैं और जो आप वास्तव में हैं — आपको कहीं जाने की ज़रूरत नहीं है — बस अपनी ओर उंगली उठाएं और आप पहले से ही सही दिशा में इशारा कर रहे हैं। ध्यान दें कि आप अपने माथे की ओर नहीं, बल्कि अपनी छाती यानी अपने हृदय की ओर इशारा करते हैं।
इसलिए, स्वयं को समाधि का तीसरा स्तर कहना वैसा ही है जैसे पृथ्वी को 'स्ट्रॉबेरी उगाने का साधन' कहना या पानी के गड्ढे को 'महासागर का पहला चरण' बताना।
समाधि दरअसल 'मैं हूँ' के लिए एक 'अस्वाभाविक अवस्था' है, इस मायने में कि यहाँ स्वयं को शरीर की एक जटिल संरचना के माध्यम से अनुभव करना पड़ता है।




