मस्तिष्क की शुरुआत कोरे कागज़ से नहीं होती: शुरुआती न्यूरल नेटवर्क बदल रहे हैं विकास की तस्वीर

द्वारा संपादित: Aleksandr Lytviak

नए आंकड़े बताते हैं कि तंत्रिका संबंध (neural connections) जन्म से बहुत पहले ही बन जाते हैं, और नवजात शिशु का मस्तिष्क कोई कोरी स्लेट नहीं, बल्कि पहले से ही संरचित सक्रियता के पैटर्न से लैस होता है।

'साइंस डेली' (ScienceDaily) में प्रकाशित यह शोध भ्रूणों और शिशुओं के मस्तिष्क की बाहरी परत (cortex) में होने वाली स्वतःस्फूर्त गतिविधियों के अवलोकन पर आधारित है। वैज्ञानिकों ने सिंक्रोनाइज़्ड संकेतों की ऐसी स्थिर तरंगों को दर्ज किया है, जो बिना किसी बाहरी उत्तेजना के उत्पन्न होती हैं और किसी भी संवेदी अनुभव से पहले ही मौजूद रहती हैं।

यह खोज 'तबुला रासा' (tabula rasa) के उस पारंपरिक सिद्धांत को चुनौती देती है, जिसमें विकास को सीखने के माध्यम से धीरे-धीरे खालीपन भरने की प्रक्रिया माना जाता था। इसके विपरीत, ऐसा प्रतीत होता है कि शुरुआती न्यूरल नेटवर्क एक बुनियादी संरचना तैयार करते हैं, जिस पर बाद में बाहरी दुनिया के अनुभव अपनी छाप छोड़ते हैं।

इस तंत्र को समझने के लिए एक पुराने रेडियो की कार्यप्रणाली से तुलना की जा सकती है: बिना एंटीना के भी यह उपकरण कुछ निश्चित आवृत्तियों (frequencies) पर सेट होता है, और बाहरी सिग्नल केवल पहले से मौजूद सर्किट को ही पुख्ता या कमजोर करते हैं।

इसके दार्शनिक परिणाम न केवल तंत्रिका विज्ञान को प्रभावित करते हैं, बल्कि जन्मजात ज्ञान की अवधारणा से भी जुड़े हैं। यदि मुख्य तंत्रिका संबंध अनुवांशिक रूप से और जन्म से पहले ही तय हो जाते हैं, तो प्रकृति (nature) और पालन-पोषण (nurture) के बीच की रेखा हमारी सोच से कहीं अधिक धुंधली हो जाती है।

भविष्य में ये निष्कर्ष विकास संबंधी विकारों के शुरुआती निदान और ऐसी कृत्रिम प्रणालियों (AI) के निर्माण को प्रभावित कर सकते हैं जो शून्य से शुरुआत करने के बजाय पूर्व-निर्धारित संरचनाओं पर आधारित होती हैं।

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स्रोतों

  • Scientists Found the Brain Doesn’t Start Blank, It Starts Full

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