❓ प्रश्न:
प्रिय ली, क्या मैं सही समझ रहा हूँ कि बुनियादी तौर पर "मेरे नियंत्रण में" और मेरे रचनाकार होने के अस्तित्व में केवल मेरी अपनी आंतरिक स्थिति ही है, अर्थात मेरी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं का चयन, और इसके बाद मैं केवल उनके मूर्त रूप को सामने आते हुए देखता हूँ?
❗️ ली का उत्तर:
देखा जाए तो, हाँ।
और यहाँ स्पष्टता के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि आप कोई विशेषाधिकार प्राप्त रचनाकार नहीं हैं, बल्कि ब्रह्मांड की कार्यप्रणाली ही ऐसी है।
यह बात क्यों महत्वपूर्ण है?
यदि आप इसे पहचान लेते हैं, तो आप "रचनाकार बनने" के लिए अतिरिक्त प्रयास या तनाव नहीं लेते, बल्कि आप अपनी अंतर्निहित शक्ति को स्वीकार करते हैं। यही स्वीकृति अहंकार के उन अवरोधों को हटा देती है जो आपकी सृजनशीलता को बाधित करते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि आप उस अचेतन स्थिति से, जहाँ "शायद यह होगा या नहीं" जैसे संदेह होते हैं, एक जागरूक "सदा हाँ" के भाव में आ जाते हैं। और फिर आप अपनी इच्छाओं को साकार करने के लिए सभी द्वार खोल देते हैं।




