ब्रिटिश कोलंबिया में 33 वर्षीय ब्रैडी नाम के एक उम्मीदवार ने केलोना की नगर परिषद के चुनाव में जीत हासिल की। उनका अभियान अपने अनोखे तरीके से अलग दिखा: आम वादों और नारों की जगह उनके पोस्टरों पर «Just trying to pay my rent», «I barely want to do this» और «Let’s see what happens?» जैसे वाक्य सजे थे।
उम्मीदवार ने मतदाताओं से खुलकर कहा कि उन्हें पता ही नहीं कि पद संभालने के बाद वे क्या करेंगे। ऐसे आत्म-निंदात्मक संदेश आँगनों में फैल गए और सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गए।
ब्रैडी की जीत ने केवल स्थानीय लोगों का ही ध्यान नहीं खींचा। उनके अभियान से जुड़ी पोस्टों को सैकड़ों हज़ार लाइक्स और टिप्पणियाँ मिलीं, जिनमें लोगों ने उनकी ईमानदारी और पारंपरिक राजनीतिक बयानबाज़ी से उनकी थकान का ज़िक्र किया।
एक प्रतिक्रिया में कहा गया कि यह तरीका शायद इसलिए काम कर गया क्योंकि मतदाता वरिष्ठ उम्मीदवारों और आम वादों से थक चुके थे। कई लोगों ने इसमें किराये के आवास की वास्तविक समस्याओं और राजनीति पर आम अविश्वास का प्रतिबिंब देखा।
आख़िर लोग ऐसे व्यक्ति को वोट क्यों देते हैं जो खुद अपनी क्षमताओं पर संदेह करता है? ब्रैडी के मामले में जवाब शायद उस सच्चाई में छिपा है, जो आम चुनाव अभियानों के उलट है।



