❓प्रश्न:
Lee, जलवायु भू-इंजीनियरिंग के बारे में आप क्या सोचते हैं? जलवायु वैज्ञानिक इस पर पूरी गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं।
❗️Lee का उत्तर:
जलवायु लोगों की सामूहिक मानसिक स्थिति को दर्शाती है। जब सभ्यता की मानसिकता 'सद्भावनापूर्ण' हो जाएगी, तो समग्र जलवायु भी वैसी ही हो जाएगी। पृथ्वी इसे हर चीज़ में प्रतिबिंबित करेगी, जिसमें ज्वालामुखियों की गतिविधि और भूकंप शामिल हैं।
और लोगों द्वारा जलवायु परिस्थितियों में हस्तक्षेप करने के लिए प्रौद्योगिकियों को आज़माना – यह पहले भी हो चुका है। पृथ्वी पहले ही ऐसे 'प्रयोगकर्ताओं' को झटक चुकी है।
इन विषयों पर सभी चर्चाएँ सामान्य 3डी प्रवृत्ति के अंतर्गत हैं – 'प्रौद्योगिकी से सृष्टि की अपूर्णता को ठीक करना'।
स्पष्ट रूप से कहें तो, यह भोलापन है, यह देखते हुए कि विश्व महासागर के औसत तापमान में 0,5 डिग्री का परिवर्तन भी एक अप्रत्याशित घटना है। आधुनिक कंप्यूटर 3 घंटों की सीमा में भी मौसम के परिणामों की गणना नहीं कर सकते। फिर कम से कम 50 वर्षों के लिए आवश्यक गणनाओं के साथ बड़े पैमाने पर प्रभाव की बात क्या करें?
कुल मिलाकर, यह ऐसी बातचीत जैसा दिखता है:
- उस खुले तार को हाथ से पकड़ो, हमें जाँचना है कि यह माइनस है या प्लस।
- और मुझे कैसे पता चलेगा कि यह माइनस है?
- तुम पकड़ो, और मुझे तुरंत पता चल जाएगा।
जलवायु भू-इंजीनियरिंग: क्या उम्मीद करें?
लेखक: lee author

136 दृश्य
स्रोतों
Сайт автора lee
इस विषय पर अधिक लेख पढ़ें:
India is reviving ancient stepwells, johads and rainwater systems as climate change and groundwater depletion deepen water scarcity across the country. Read more on shorts91.com/index.php/cont… #WaterCrisis #ClimateChange #India #Groundwater #WaterConservation #Sustainability
क्या आपने कोई गलती या अशुद्धि पाई?हम जल्द ही आपकी टिप्पणियों पर विचार करेंगे।


