इलॉन मस्क आधिकारिक तौर पर शुक्रवार, 12 जून, 2026 को इतिहास के पहले डॉलर ट्रिलियनेयर (खरबपति) बन गए। यह सफलता उनकी एयरोस्पेस कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) के शेयरों की नैस्डैक पर सार्वजनिक ट्रेडिंग शुरू होने के बाद हासिल हुई। भविष्य में खरबपतियों की संख्या में और अधिक वृद्धि होने की कितनी संभावना है?
आइए अरबपतियों के इतिहास पर एक नजर डालते हैं। जॉन रॉकफेलर 1916 में दुनिया के पहले डॉलर अरबपति बने थे। अगले करीब पचास वर्षों तक वह आधिकारिक रूप से दुनिया के एकमात्र अरबपति बने रहे — उनके बाद पॉल गेट्टी के रूप में दूसरा अरबपति केवल 1968 में सामने आया। 1950 के दशक में, जीन पॉल गेट्टी एक दिग्गज तेल व्यवसायी के रूप में उभरे और 1957 में उन्हें दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति का दर्जा मिला। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अरबपति होने की पुष्टि 1968 में हुई थी।
अरबपतियों की संख्या में वास्तविक उछाल 20वीं सदी के अंत में शुरू हुआ और 21वीं सदी की डिजिटल क्रांति ने इसे और भी तेज कर दिया। फोर्ब्स के 2026 के आंकड़ों के अनुसार, आज दुनिया भर में 3,428 अरबपति मौजूद हैं।
विकास के प्रमुख पड़ाव:
1987 — फोर्ब्स की अरबपतियों की पहली सूची जारी की गई, जिसमें लगभग 200 नाम शामिल थे।
2000-2008 — डिजिटल क्रांति के परिणामस्वरूप अरबपतियों की सामूहिक संपत्ति $350 बिलियन से बढ़कर $6 ट्रिलियन तक पहुंच गई।
2008-2019 — मंदी के बाद के सुधार के दौर में कुल संपत्ति $6 ट्रिलियन से बढ़कर $11-11.5 ट्रिलियन के बीच हो गई।
2020-2021 — महामारी के दौरान रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई: 416 नए अरबपति बने और कुल संपत्ति $8.6 ट्रिलियन से बढ़कर $13.8 ट्रिलियन हो गई।
2021 — शेयर बाजार में आई भारी तेजी ने इस रिकॉर्ड को और पुख्ता कर दिया।
2024 — यह साल वृद्धि के मामले में दूसरे स्थान पर रहा, जिसमें 204 नए अरबपति (+8%) जुड़े।
2025 — एक और रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई: 287 नए अरबपति (+8.8%) बने, जिससे कुल संख्या लगभग 2900 हो गई।
इस उछाल के पीछे के कारण:
2000 के दशक की शुरुआत में आई डिजिटल क्रांति ने टेक कंपनियों को संपत्ति निर्माण का मुख्य केंद्र बना दिया। 2020-2021 की महामारी के दौरान आर्थिक प्रोत्साहन पैकेजों और कम ब्याज दरों ने संपत्तियों की कीमतों में जबरदस्त उछाल ला दिया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में तकनीकी कंपनियों का निरंतर विकास अरबपतियों की संख्या को और बढ़ा रहा है।
मिलियनेयर (करोड़पति)
डॉलर मिलियनेयरों की संख्या में हुई वृद्धि का विश्लेषण करना भी काफी दिलचस्प है। वर्ष 1900 में डॉलर मिलियनेयर होना एक बेहद दुर्लभ बात थी। यह केवल कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों और भू-स्वामियों तक सीमित था, और तब "मिलियनेयर" शब्द किसी दंतकथा जैसा सुनाई देता था। विभिन्न अनुमानों के अनुसार, उस समय दुनिया भर में उनकी संख्या एक हजार से भी कम थी, हालांकि इसका कोई सटीक सांख्यिकीय डेटा उपलब्ध नहीं है।
1950 के दशक के भी सटीक वैश्विक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन विश्वसनीय विशेषज्ञों का मानना है कि 1950 में दुनिया में 20,000 से 30,000 डॉलर मिलियनेयर थे, जिनमें से ज्यादातर अमेरिका में थे। उस समय पूरी दुनिया में डॉलर अरबपति नाममात्र के ही थे।
तुलना के लिए, 2026 तक दुनिया में डॉलर मिलियनेयरों की संख्या 2.5 करोड़ (25 मिलियन) से अधिक हो गई है। यह 76 वर्षों में 1000 गुना की वृद्धि है, जो प्रतिशत में 99,900% बैठती है। 2010 के दशक और खासकर 2020 के बाद इनकी संख्या में भारी इजाफा हुआ है। इसके मुख्य कारणों में शेयर और रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतें, शेयर बाजारों का विस्तार, टेक कंपनियों का उछाल और मौद्रिक प्रोत्साहन (कम ब्याज दरें, QE) शामिल हैं।
हाल के समय में इस वृद्धि की मुख्य वजहें:
- मौद्रिक नीति: केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरें कम रखीं और बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ाया, जिससे जोखिम वाली संपत्तियों के दाम बढ़ गए।
- तकनीक: दिग्गज टेक और पेमेंट कंपनियों के बढ़ते बाजार मूल्य ने IPO और निजी वैल्यूएशन के जरिए भारी संपत्ति पैदा की।
- निवेश संस्कृति: मोबाइल ऐप्स और प्लेटफॉर्म के जरिए अब आम निवेशकों की पहुंच शेयर, ETF और क्रिप्टोकरेंसी तक आसान हो गई है।
- रियल एस्टेट: कई देशों में घरों की कीमतें तेजी से बढ़ीं, जिससे कई लोग अपनी नेट वर्थ के आधार पर डॉलर मिलियनेयर बन गए।
- मुद्रा का प्रभाव: समय-समय पर डॉलर या स्थानीय मुद्राओं की मजबूती भी डॉलर में संपत्ति की गणना को प्रभावित करती है।
अब दुनिया को ट्रिलियनेयरों (खरबपतियों) के क्लब में बढ़ोतरी का इंतजार है।




