ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति के कारण वैश्विक ऊर्जा प्रणाली आज एक ऐतिहासिक 'निर्णायक मोड़' पर खड़ी है। एनर्जी इंस्टीट्यूट (Energy Institute) द्वारा वैश्विक ऊर्जा प्रणालियों पर जारी एक नई समीक्षा रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में बिजली की खपत में 3% की वृद्धि हुई, और इतिहास में पहली बार इस बढ़ी हुई माँग को पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (RE) द्वारा पूरा किया गया।
'ग्रीन' उत्पादन और ऊर्जा भंडारण में रिकॉर्ड वृद्धि
समीक्षा में पर्यावरण के अनुकूल स्वच्छ ऊर्जा के तेजी से विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। 2025 तक वैश्विक सौर ऊर्जा उत्पादन में 30% की भारी वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह बाजार का सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र बन गया है। ग्रिड में अस्थिर उत्पादन की इतनी बड़ी मात्रा को एकीकृत करने में सबसे बड़ी भूमिका बैटरी स्टोरेज क्षमता में हुई 66% की जबरदस्त बढ़ोतरी ने निभाई है।
चीन और भारत: ऊर्जा परिवर्तन के प्रमुख वाहक
पिछले वर्षों की तरह, इस बदलाव में चीन निर्विवाद रूप से अग्रणी बना हुआ है। इस देश ने दुनिया के बाकी सभी देशों की संयुक्त क्षमता से भी कहीं अधिक पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की हैं। खास बात यह है कि इस तेजी के बीच चीन में कोयला आधारित बिजली घरों से उत्पादन कम होने लगा है, जो जीवाश्म ईंधन के वास्तविक विस्थापन का एक ठोस संकेत है।
भारत भी ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण की दिशा में शानदार प्रगति दिखा रहा है। देश में कोयला, तेल और गैस आधारित बिजली संयंत्रों के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि नवीकरणीय स्रोतों से बिजली उत्पादन में लगभग 24% की वृद्धि हुई है।
अमेरिकी विरोधाभास: वैश्विक रुझान के बीच बढ़ता उत्सर्जन
वैश्विक प्रगति के बावजूद, रिपोर्ट में कुछ चिंताजनक क्षेत्रीय अंतर सामने आए हैं जो कार्बन फुटप्रिंट में होने वाली कुल कमी की रफ्तार को धीमा कर रहे हैं। विशेषज्ञों के लिए अमेरिका की स्थिति गहरी चिंता का विषय बनी हुई है, जहाँ कोयले के उपयोग और तेल के उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है।
संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन चीन की तुलना में चार गुना अधिक तेजी से बढ़ा है। वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन (CO₂) में हुई 1.1% की कुल वृद्धि के पीछे मुख्य कारण अमेरिका ही रहा है। यह असंतुलन दर्शाता है कि एक क्षेत्र की तकनीकी प्रगति दूसरे क्षेत्रों के पिछड़ेपन के कारण बेअसर हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय: तकनीक तैयार है, राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत
एनर्जी इंस्टीट्यूट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. निक वेट ने कहा, "हम ऊर्जा क्षेत्र में जीवाश्म ईंधन के विस्थापन की उत्साहजनक गति देख रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वैश्विक उत्सर्जन में वृद्धि अभी भी जारी है।" उन्होंने आगे कहा कि ये निष्कर्ष ऊर्जा दक्षता में सुधार, बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में निवेश बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर देते हैं।
निष्कर्ष
इस 'निर्णायक मोड़' पर पहुँचने का अर्थ है कि जीवाश्म ईंधन को छोड़ने के लिए आवश्यक तकनीकी और आर्थिक आधार तैयार हो चुका है: अब नवीकरणीय स्रोत और ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ दुनिया की बढ़ती पूरी माँग को पूरा करने में सक्षम हैं। हालांकि, आँकड़े बताते हैं कि समन्वित वैश्विक प्रयासों और कुछ देशों द्वारा हाइड्रोकार्बन उत्पादन में वृद्धि को रोके बिना, जलवायु लक्ष्य खतरे में बने रहेंगे। ऊर्जा परिवर्तन का भविष्य अब केवल 'ग्रीन' तकनीकों की उपलब्धता पर नहीं, बल्कि उन्हें व्यापक रूप से अपनाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है।
यह लेख एनर्जी इंस्टीट्यूट की हालिया समीक्षा (Energy Institute Statistical Review of World Energy) के आंकड़ों पर आधारित है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार के वर्तमान रुझानों को दर्शाता है।




