हाल ही में arXiv पर सामने आए एक शोध पत्र में भौतिकविदों ने क्वांटम मैकेनिक्स के भीतर प्रेक्षक के चुनाव को निरपेक्ष मानने की संभावना पर सवाल उठाए हैं। विग्нер के मित्र का विरोधाभास, जहाँ एक प्रेक्षक सिस्टम को मापता है और दूसरा पहले प्रेक्षक की स्थिति को मापता है, इस निष्कर्ष पर ले गया है कि स्वतंत्र चुनाव दृष्टिकोण पर निर्भर हो सकते हैं।
यूरोपीय समूहों के शोधकर्ताओं ने उस परिदृश्य का विश्लेषण किया जिसमें विग्нер का मित्र किसी कण के स्पिन को मापता है, जबकि विग्нер स्वयं उसी सिस्टम को सुपरपोजिशन के रूप में वर्णित करते हैं। मई 2024 में प्रकाशित एक प्रीप्रिंट के अनुसार, यदि दोनों प्रेक्षक एक-दूसरे के क्वांटम विवरणों का उपयोग करते हैं, तो चुनाव की निरपेक्षता खंडित हो जाती है। यह केवल एक वैचारिक प्रयोग नहीं है, बल्कि क्वांटम संदर्भों के सिद्धांतों का उपयोग करके की गई एक सटीक गणना है।
कल्पना कीजिए कि दो लोग एक साथ तय कर रहे हैं कि चौराहे पर किस ओर मुड़ना है, लेकिन उनके निर्णय केवल तभी सुसंगत होते हैं जब एक व्यक्ति दूसरे के चुनाव को अभी तक अनिश्चित संभावना के रूप में देखता है। इस मॉडल की कार्यप्रणाली बिल्कुल ऐसी ही है: एक प्रेक्षक का मापन दूसरे के लिए तब तक अनिश्चित बना रहता है जब तक कि उनके बीच ऐसी कोई अंतःक्रिया न हो जाए जो कोहेरेंस को समाप्त कर दे।
यह परिणाम क्वांटम क्रिप्टोग्राफी प्रोटोकॉल और बेल परीक्षणों में 'स्वतंत्र चुनाव' की समझ को बदल देता है। यदि चुनाव निरपेक्ष नहीं हैं, तो सेटिंग्स की स्वतंत्रता पर भरोसा करने वाले उपकरण सुरक्षा के गलत आश्वासन दे सकते हैं। टीम का कहना है कि ये निष्कर्ष अभी सैद्धांतिक हैं और इन्हें फोटोनिक या आयनिक प्रणालियों पर प्रयोगात्मक रूप से परखने की आवश्यकता है।
यह शोध हाल के वर्षों में विकसित उस पद्धति पर आधारित है जो एक ही क्वांटम सिस्टम के भीतर मौजूद कई प्रेक्षकों की व्याख्या करती है। लेखकों ने दिखाया है कि कुछ परिस्थितियों में दो प्रेक्षक एक ही मापन के परिणाम पर परस्पर विरोधी निष्कर्ष निकाल सकते हैं, जबकि दोनों ने ही क्वांटम थ्योरी के नियमों का पूरी तरह पालन किया हो।
इस प्रकार, मापन की स्वतंत्रता से जुड़ी सबसे बुनियादी धारणाएं भी संदर्भ-आधारित हो जाती हैं, विशेषकर तब जब प्रेक्षक स्वयं उस क्वांटम विवरण का हिस्सा बन जाते हैं।




