अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को बिना पूर्व सूचना और खतरों की घोषणा के अवसर के प्रवासियों को तीसरे देशों में निर्वासित करने की प्रक्रिया बहाल करने की अनुमति दी।
न्यायालय ने न्याय विभाग के आपात अनुरोध को स्वीकार कर लिया और बोस्टन के संघीय न्यायाधीश ब्रायन मर्फी के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें उन्होंने गृह सुरक्षा विभाग की नीति को अवैध ठहराया था।
यह फैसला रूढ़िवादी बहुमत द्वारा 6 मतों के मुकाबले 3 मतों से लिया गया। न्यायमूर्ति सोनिया सोटोमायोर, एलेना कागन और केतांजी ब्राउन जैक्सन ने इसका विरोध किया।
सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर में इस मामले पर पक्षकारों के तर्क सुनने पर भी सहमति जताई, जिसके बाद वह अंतिम फैसला सुनाएगा।
यह नीति प्रवासियों को, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जिनके मूल देश उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर देते हैं, उन देशों में तेजी से निर्वासित करने की अनुमति देती है जिनके साथ अमेरिका के समझौते हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, यह उपाय लागू होने के बाद से अब तक 25 हज़ार से अधिक लोगों को 29 देशों में निर्वासित किया जा चुका है।
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इन प्रतिबंधों ने अपराधियों और अन्य उल्लंघनकर्ताओं को देश से प्रभावी ढंग से निकालने में बाधा डाली। इस नीति के विरोधी गंतव्य देशों में उत्पीड़न और यातना के खतरों की ओर इशारा करते हैं।

