लंदन स्थित बायोटेक स्टार्टअप मास बैलेंस (Mass Balance) ने सफलतापूर्वक अपना पहला स्वायत्त प्रयोग कक्षा में भेजा है, जिसे शोधकर्ता 'लोंजिविटी लैब' कह रहे हैं। स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजी गई यह मशीन उम्र से संबंधित बीमारियों के अध्ययन में एक बड़ी सफलता हासिल करने के लिए बनाई गई है। वैज्ञानिकों की योजना माइक्रोग्रैविटी की विशिष्ट परिस्थितियों का उपयोग उन प्रोटीनों के अध्ययन के लिए करने की है, जिनका पृथ्वी पर अध्ययन करना अब तक लगभग असंभव था।
ग्रेपफ्रूट के आकार की 'प्रयोगशाला'
इस प्रायोगिक मॉड्यूल का नाम MB-X1 है, जिसका आकार महज एक ग्रेपफ्रूट या एक इंसानी मुट्ठी के बराबर है।
ऑस्ट्रियाई स्पेस लॉजिस्टिक्स कंपनी टम्बलवीड (Tumbleweed) द्वारा विकसित और ओएसिस अल्फा (Oasis Alpha) उपग्रह में एकीकृत इस 10-सेंटीमीटर के स्वायत्त पॉड के अंदर बेहद जटिल उपकरण लगे हैं।
इसमें रासायनिक पदार्थ, जीवित कोशिकाएं, उच्च संवेदनशील सेंसर और उनके जीवन तथा कामकाज को बनाए रखने के लिए जरूरी नियंत्रण प्रणाली शामिल हैं।
अगले कुछ महीनों तक यह कैप्सूल पृथ्वी की परिक्रमा करेगा, इस दौरान यह स्वचालित रूप से माप लेगा और पृथ्वी पर डेटा भेजेगा कि कम गुरुत्वाकर्षण में कोशिकाएं और रासायनिक प्रतिक्रियाएं कैसे काम करती हैं।
पहले परीक्षण के रूप में, इस प्लेटफॉर्म ने एक औद्योगिक बायो-कैटेलिस्ट को अंतरिक्ष में भेजा है जो एक रासायनिक यौगिक को विखंडित करेगा, जबकि सेंसर प्रकाश के माध्यम से इस प्रक्रिया पर नजर रखेंगे और प्रतिक्रिया की सफलता की पुष्टि करेंगे।
माइक्रोग्रैविटी की आवश्यकता क्यों है?
पृथ्वी पर, उच्च-सटीक जैविक डेटा एकत्र करना गुरुत्वाकर्षण के कारण जटिल हो जाता है, जिससे संवहन (तापमान के अंतर के कारण तरल पदार्थों का मिश्रण) और अवसादन (भारी कणों का बैठना) जैसी प्रक्रियाएं होती हैं।
ये कारक आणविक प्रक्रियाओं की तस्वीर को बिगाड़ने वाला 'शोर' पैदा करते हैं। भारहीनता में ये प्रभाव खत्म हो जाते हैं, जिससे वैज्ञानिकों को सेलुलर स्तर पर होने वाली गतिविधियों की बिल्कुल स्पष्ट तस्वीर मिलती है।
मास बैलेंस के सीईओ और सह-संस्थापक टोबी कॉल कहते हैं, "जब आप गुरुत्वाकर्षण को हटा देते हैं, तो कई अजीब और अद्भुत चीजें होती हैं, जिनमें से कुछ जीवन विज्ञान और फार्मास्यूटिकल्स के लिए बेहद मूल्यवान साबित होंगी।"
पकड़ में न आने वाले दुश्मन: अव्यवस्थित संरचना वाले प्रोटीन
इस मिशन का मुख्य लक्ष्य तथाकथित अव्यवस्थित (आंतरिक रूप से अव्यवस्थित) संरचना वाले प्रोटीनों का अध्ययन करना है। उन पारंपरिक प्रोटीनों के विपरीत जिनका एक निश्चित त्रि-आयामी आकार होता है, ये अणु पृथ्वी पर लगातार अपना स्वरूप बदलते रहते हैं।
यही 'ट्रांसफॉर्मर प्रोटीन' अल्जाइमर, पार्किंसंस और विभिन्न प्रकार के कैंसर सहित उम्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों के विकास से गहराई से जुड़े हुए हैं।
पृथ्वी पर उनके अस्थिर आकार के कारण उन्हें देखना और अध्ययन करना बेहद कठिन है। इसके अलावा, यह विशेषता गूगल के अल्फाफोल्ड (AlphaFold) जैसे उन्नत तंत्रिका नेटवर्क के प्रशिक्षण के लिए डेटा में एक बड़ी कमी पैदा करती है, जो यह अनुमान नहीं लगा पाते कि ऐसे प्रोटीन कैसा व्यवहार करेंगे और दवाओं से उन पर कैसे प्रभाव डाला जाए।
टोबी कॉल बताते हैं, "इन प्रोटीनों की कोई निश्चित संरचना नहीं होती—यही कारण है कि वे इतने सारे अद्भुत काम कर सकते हैं। लेकिन जब कुछ गलत होता है, तो यह कई बीमारियों का कारण बनता है।"
उनके अनुसार, ये प्रोटीन आधुनिक चिकित्सा के लिए एक वास्तविक चुनौती हैं, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से इन्हें दवाओं की पहुंच से बाहर माना जाता रहा है।
दीर्घायु की रक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
मास बैलेंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से इस समस्या का समाधान कर रहा है। अंतरिक्ष की माइक्रोग्रैविटी में इन अव्यवस्थित प्रोटीनों के व्यवहार पर विशिष्ट डेटा जुटाकर, स्टार्टअप इसका उपयोग एक विशेष एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए करने की योजना बना रहा है।
यह 'एडॉप्टर' मॉडल मौजूदा डेटाबेस की कमियों को भरेगा और 'ट्रांसफॉर्मर प्रोटीनों' की संरचना और व्यवहार की भविष्यवाणी करना सीखेगा, साथ ही उन्हें ब्लॉक करने में सक्षम अणुओं की पहचान भी करेगा।
कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "गुरुत्वाकर्षण की बेड़ियों से मुक्त, MB-X1 मॉड्यूल अल्जाइमर और कैंसर जैसी ऐतिहासिक रूप से असाध्य बीमारियों के इलाज की भारी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में पहला कदम है।"
एक नियमित प्रयोगशाला के रूप में अंतरिक्ष
हालांकि आज अंतरिक्ष बायोटेक प्रयोग किसी विज्ञान फंतासी की तरह लग सकते हैं, लेकिन मास बैलेंस को भरोसा है कि यही भविष्य है। टोबी कॉल का मानना है कि अंतरिक्ष अनुसंधान को एक दुर्लभ घटना के बजाय दवा कंपनियों के लिए एक मानक प्रक्रिया बन जाना चाहिए।
टोबी कॉल निष्कर्ष निकालते हैं, "आज यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन हमारा लक्ष्य अंतरिक्ष को उबाऊ, भरोसेमंद और महज एक अन्य शोध वातावरण बनाना है।"




