लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर पर हिग्स बोसॉन के क्षय में जन्मे दो भारी Z-बोसॉन क्वांटम रूप से उलझे हुए पाए गए — और यह पहली बार है कि इसे विद्युत-दुर्बल ऊर्जा पैमाने पर सीधे मापा जा सका।
CERN (जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड) में LHC पर ATLAS सहयोग ने प्रोटॉन टकरावों के आँकड़ों का विश्लेषण किया और उन घटनाओं को चिह्नित किया जिनमें हिग्स Z-बोसॉनों के एक युग्म में क्षयित होता है। फिर प्रत्येक Z-बोसॉन लेप्टॉनों या क्वार्कों के एक युग्म में क्षयित होता है, जो डिटेक्टर में विशिष्ट चिह्न छोड़ता है। वैज्ञानिकों ने कणों के स्पिन और संवेग का पुनर्निर्माण किया, और फिर उनके सहसंबंधों पर उलझाव के मानदंड लागू किए। परिणाम सितंबर 2026 में Physical Review Letters में प्रकाशित हुए।
यहाँ उलझाव का अर्थ है कि एक Z-बोसॉन के गुण दूसरे Z-बोसॉन के गुणों से तत्क्षण जुड़े होते हैं, चाहे मापन के क्षण में उनके बीच की दूरी कुछ भी हो। दो सिक्कों की कल्पना कीजिए जो एक साथ उछाले गए हैं: जब तक वे हवा में हैं, प्रत्येक चित या पट आ सकता है, लेकिन जैसे ही एक चित पर गिरता है, दूसरा अनिवार्य रूप से पट पर ही गिरेगा — और यह संयोग नहीं, बल्कि एक कठोर संबंध है जो युग्म के जन्म के क्षण में ही स्थापित हो चुका था।
सामान्य अंतर्ज्ञान कहता है कि Z-बोसॉन जैसे भारी कण पर्यावरण के साथ अन्योन्यक्रिया के कारण अपने क्वांटम गुण शीघ्र खो देते हैं। फिर भी हिग्स के क्षयों में उलझाव इतने समय तक बना रहता है कि उसे दर्ज किया जा सके। यह मूलभूत अन्योन्यक्रियाओं के परीक्षण का एक नया प्रकार खोलता है: अब क्वांटम यांत्रिकी की जाँच केवल फ़ोटॉनों या इलेक्ट्रॉनों पर ही नहीं, बल्कि भारी सदिश बोसॉनों पर भी की जा सकती है।
यह मापन पुष्टि करता है कि मानक मॉडल भारी गेज बोसॉनों के लिए भी क्वांटम व्यवस्था में काम करता है। भविष्य में ऐसे आँकड़े क्वांटम क्षेत्र सिद्धांत की प्रयोज्यता की सीमाओं को और स्पष्ट करने में मदद करेंगे और मानक मॉडल से परे नई भौतिक परिघटनाओं की खोज को प्रभावित कर सकते हैं।
Physical Review Letters में प्रकाशित ATLAS सहयोग के परिणाम दर्शाते हैं कि उच्च ऊर्जा भौतिकी के सबसे अप्रत्याशित कोनों में भी क्वांटम उलझाव का अध्ययन किया जा सकता है।


