❓प्रश्न:
हम पहले से ही जानते हैं कि प्रेम एक ऐसी अवस्था है जो हमारे भीतर जन्म लेती है, और साथी केवल इसे प्रतिबिंबित करता है, इसे उजागर करता है। क्या आदर्श प्रेम का कोई सूत्र है? एक जोड़े में सह-सृजन और एकता का? क्या कोई व्यक्ति एक ही समय में दो लोगों से प्रेम कर सकता है?
❗️उत्तर lee:
मनुष्य एक ही समय में सभी से प्रेम कर सकता है। लेकिन जिसे आप 'जोड़ा' (युगल) के रूप में समझते हैं, वह परिवर्तनों की गतिशीलता में सामंजस्य है। यह उस हद तक तालमेल है जहाँ विचारों का एक हिस्सा समान हो जाता है - यह सीधे तौर पर एक साझा अनुभूति है कि दूसरा व्यक्ति क्या महसूस कर रहा है।
अर्थात, सभी के लिए प्रेम पूरे समाज की टेलीपैथी में बदल जाता है - कार्यों में तालमेल (कानून और नियम गायब हो जाते हैं), और साथी वह होता है जिसके साथ परिवर्तनों की गतिशीलता में ही तालमेल स्थापित होता है। दूसरों के साथ आप सही समय पर सही जगह पर मिलते हैं, लेकिन साथी के साथ आप आगे बढ़ते रहते हैं। रूपक के तौर पर कहें तो - आप लंबी दूरी तक कदम से कदम मिलाकर चलते हैं, सामान्य मुद्दों को हल करते हैं और साझा रचनाएँ करते हैं।
इसी अर्थ में आज लोग बच्चों के जन्म के लिए भी स्थान बनाते हैं, लेकिन अक्सर संवेदनाओं में तालमेल न्यूनतम होता है - हर किसी का अहंकार अलग-अलग दुनिया देखता है। लेकिन अभी भी ऐसे लोग हैं जो कहीं अधिक तालमेल में हैं, जो प्रेम (प्रवाह) को तब महसूस करते हैं जब सामान्य कार्य (प्रक्रियाएं, रचनाएं, संभोग) पारस्परिक रूप से हल किए जाते हैं।

