एक ही सूत्र से जुड़े: मानसिक थकान के संकेत देने के लिए मस्तिष्क कैसे त्वचा का उपयोग करता है

लेखक: lee author

एक ही सूत्र से जुड़े: मानसिक थकान के संकेत देने के लिए मस्तिष्क कैसे त्वचा का उपयोग करता है-1
त्वचा की समस्याएं क्या बताती हैं?

❓ प्रश्न:

त्वचा की समस्याएँ असल में क्या दर्शाती हैं? जब कोई भी बाहरी उपचार काम न कर रहा हो, तो अपनी सोच में क्या बदलाव करने की आवश्यकता है?

❗️ उत्तर:

त्वचा 'स्व' और 'पर' के बीच की एक विभाजक रेखा है। इसकी सामान्य स्थिति बाहरी दुनिया के साथ आपके संबंधों, लोगों के बीच की मर्यादाओं, आपसी संवाद और सहानुभूति को उजागर करती है।

बाहरी रासायनिक उत्पाद इसके प्रभाव को केवल कम कर सकते हैं या उसे छिपा सकते हैं, लेकिन वे मूल समस्या यानी दूसरों के साथ आपके रिश्तों में मौजूद असंतुलन का समाधान नहीं करते हैं।

इसका एक आम छिपा हुआ कारण यह है—"मैं सबको सब कुछ देता हूँ, लेकिन कोई मेरा मूल्य नहीं समझता।" अर्थात, असली वजह स्वयं का अवमूल्यन करना और/या केवल देने के प्रति झुकाव के कारण ग्रहण करने की अक्षमता वाला असंतुलन है।

ऐसे में व्यक्ति को लगता है कि वह बहुत "परोपकारी" है और उसे समझ नहीं आता कि उसे बाहरी दुनिया से "कृतघ्नता" क्यों मिल रही है। यहाँ धर्म अक्सर कर्म के सिद्धांत (पूर्वी विचारधाराओं में) या बलिदान को पुण्य (ईसाई परंपराओं में) के रूप में प्रस्तुत कर इस मुद्दे को ढंक देता है।

लेकिन इस स्थिति में भी मूल कारण वही रहता है—स्वयं के प्रति सम्मान का अभाव और खुद को कम आंकना।

कारण चाहे यह हो या कोई और—त्वचा हमेशा 'मैं' और 'वे' के संबंधों को ही स्पर्श करती है। यह किसी घटना के प्रति त्वचा की केवल एक 'प्रतिक्रिया' नहीं है, बल्कि यह स्वयं व्यक्ति की अपनी धारणाओं और मानसिक नजरिए की अभिव्यक्ति है।

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स्रोतों

  • Сайт автора lee

  • Lee I.A.

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