आत्मज्ञान प्राप्त करने वाले व्यक्ति को मृत्यु के बाद किस प्रकार का अनुभव होता है?
❓ प्रश्न:
उस व्यक्ति के लिए जीवन के बाद का अनुभव कैसा होगा जिसने खुद को सर्वत्र महसूस किया है? और क्या यह उस व्यक्ति के अनुभव से अलग है जिसने स्वयं को 'स्रोत' के रूप में पहचाना है?
❗️ ली (lee) का उत्तर:
स्वयं को समस्त अस्तित्व के साथ एकाकार महसूस करने के बाद, आप अब नश्वर नहीं रह जाते, क्योंकि भौतिक और अभौतिक अनुभवों के बीच की सीमा समाप्त हो जाती है। आपके लिए संपूर्ण विश्व एक अखंड स्थान बन जाता है, जहाँ आप अतीत और भविष्य के बीच बिना किसी विच्छेद के सचेत रूप से निवास करते हैं। इसलिए, 'जीवन के बाद' की स्थिति वैसी ही होगी जैसे आज आप 'नींद से जागने' के बारे में कहते हैं।
यदि आप स्वयं को 'स्रोत' के रूप में पहचानने के बोध तक पहुँच जाते हैं, तो आप 'जीवन के बाद' को 'बचपन बीतने' जैसा अनुभव करते हैं।
'नींद के बाद' के अंतर में - इस खेल के भीतर की विस्मृति अपना कुछ प्रभाव छोड़ सकती है। 'बचपन के बाद' वाले बोध में भौतिक जीवन के भीतर विस्मृति का कोई अवशेष भी नहीं रहता, बल्कि इसे 'विकास के एक चरण' के रूप में देखा जाता है।
निकट भविष्य में, मानवता सामूहिक स्तर पर इस प्रकार के बोध की ओर बढ़ेगी। प्राण त्यागना अब कोई त्रासदी नहीं रह जाएगी। यह चेतना के विस्तार का एक सचेत चुनाव होगा। अर्थात, जीवित रहते हुए भी अपने अन्य अवतारों की स्मृति बनी रहेगी। जन्म और मृत्यु को पोर्टल के माध्यम से आवाजाही की तरह समझा जाएगा - जैसे 'किसी कार्य के लिए अंदर गए, कार्य संपन्न किया और बाहर आ गए।' चौथी सघनता (5D आयाम) के लिए यह एक सामान्य बात है।




