ओकिनावा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों ने पहली बार हीरे के NV-केंद्रों में इलेक्ट्रॉनों के क्वांटम स्पिनों से सेंटीमीटर आकार की वस्तु को हिलाने में सफलता पाई। क्वांटम बल पर मिली यह शास्त्रीय यांत्रिक प्रतिक्रिया उस द्रव्यमान पर दर्ज की गई, जो पिछले रिकॉर्डों से आठ-नौ कोटि अधिक है।
जापान में OIST की Quantum Machines Unit के प्रोफेसर जेसन ट्वामली के नेतृत्व वाली टीम ने नाइट्रोजन-वैकेंसी केंद्रों वाले हीरे का उपयोग किया, जिसे कार्बन की छड़ से ग्रेफाइट प्लेट पर लटकाया गया था। प्लेट को चुंबकों की सरणी के ऊपर प्रतिचुंबकीय प्रभाव के कारण उत्प्लावित रखा गया था। 50 मिलीवाट की हरी लेज़र ने स्पंदों में हीरे को प्रकाशित किया, जिससे NV-केंद्रों में इलेक्ट्रॉनों के स्पिन ध्रुवीकृत हुए और अत्यंत सूक्ष्म चुंबकीय उतार-चढ़ाव पैदा हुए। इन उतार-चढ़ावों ने हीरे को नीचे की ओर धकेला, और इंटरफेरोमीटर ने ग्रेफाइट प्लेट के विस्थापन को पिकोमीटर तक की सटीकता से दर्ज किया। पूरे संकुल का वज़न लगभग 128 मिलीग्राम था, और विस्थापन सौ नैनोमीटर तक पहुँचा।
यह प्रयोग 7 अक्टूबर 2026 को Science Advances पत्रिका में प्रकाशित हुआ। परिणामों की समीक्षा-सहित प्रकाशन में पुष्टि की गई है और वे स्पिनों के क्वांटम बल पर शास्त्रीय प्रतिक्रिया का वर्णन करते हैं, न कि स्वयं अध्यारोपण का। NV-केंद्रों को उनके दीर्घ काल तक बने रहने वाले संसक्तता के कारण चुना गया, जो अन्य प्रणालियों की तुलना में कमरे के तापमान पर क्वांटम अवस्थाओं को अधिक समय तक सुरक्षित रखने की अनुमति देता है।
एक नन्हे कम्पास की कल्पना कीजिए, जिसकी सुई किसी अदृश्य क्षेत्र के प्रभाव से घूमकर पूरी रेलगाड़ी को धकेल देती है: इसी प्रकार इलेक्ट्रॉनों के स्पिन, जिनमें से प्रत्येक एक लघु चुंबक की तरह व्यवहार करता है, मिलकर एक स्थूल वस्तु को विस्थापित कर सके। यह केवल संकेत का प्रवर्धन नहीं है — यह उस क्षेत्र में क्वांटम प्रभाव की सीधी अभिव्यक्ति है, जहाँ गुरुत्वाकर्षण पहले से ही ध्यान देने योग्य है।
यह उपलब्धि स्थूल अध्यारोपण के निर्माण और क्वांटम गुरुत्वाकर्षण के सीधे परीक्षणों का मार्ग खोलती है। इसी सिद्धांत पर अतिसंवेदनशील संवेदक बनाए जा सकते हैं, जो अंधकार पदार्थ और गुरुत्वीय तरंगों की खोज में सहायक होंगे। वैज्ञानिकों का कहना है कि उस क्षेत्र के निकट पहुँचने के लिए द्रव्यमान को अभी एक कोटि और बढ़ाना शेष है, जहाँ क्वांटम प्रभाव गुरुत्वीय प्रभावों के तुल्य हो जाएँगे।
अक्टूबर 2026 में Science Advances में प्रकाशित परिणाम दर्शाते हैं कि क्वांटम और शास्त्रीय जगत के बीच की सीमा सेंटीमीटर तक खिसक गई है।

