परम शून्य के निकट तापमान पर प्रयोगशाला में CeRu₄Sn₆ क्रिस्टल के इलेक्ट्रॉन ऐसे व्यवहार करते हैं जैसे वे सभी पुराने नियमों को अनदेखा कर रहे हों। शोधकर्ताओं के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने वहाँ एक टोपोलॉजिकल अर्ध-धात्विक प्रावस्था दर्ज की — ऐसी अवस्था, जिसे अब तक क्वांटम क्रिटिकैलिटी के शासन के साथ असंगत माना जाता था।
क्वांटम क्रिटिकैलिटी तब उत्पन्न होती है जब कोई पदार्थ प्रावस्था संक्रमण की सीमा पर होता है। सामान्य कणों के स्थान पर इलेक्ट्रॉनों का वर्णन सामूहिक उच्चावचों द्वारा किया जाता है, जो तरंगों के उफनते समुद्र जैसे होते हैं। पहले माना जाता था कि ऐसे «समुद्र» में इलेक्ट्रॉनिक अवस्थाओं की स्थिर टोपोलॉजिकल संरचना बिल्कुल ही टिक नहीं पाएगी।
प्रयोग ने इस धारणा को खंडित किया। वैज्ञानिकों ने CeRu₄Sn₆ के नमूने को लगभग शून्य तक ठंडा किया और उसमें से धारा प्रवाहित की। बिना किसी बाहरी चुंबकीय क्षेत्र के एक विषम हॉल प्रभाव उत्पन्न हुआ — आवेश वाहकों का एक ओर विक्षेपण। यह प्रभाव अवस्था की टोपोलॉजिकल प्रकृति का सीधा प्रमाण है।
राइस विश्वविद्यालय के भौतिकविद् किमियाओ सी ने कहा: प्रबल क्वांटम उच्चावच टोपोलॉजी को नष्ट नहीं करते, बल्कि इसके विपरीत, उसे बनने और सुदृढ़ होने में सहायता करते हैं। अधिकतम टोपोलॉजिकल अनुक्रिया ठीक वहीं देखी गई जहाँ इलेक्ट्रॉनों की अस्थिरता सबसे अधिक थी।
यह खोज ऐसे नए पदार्थों का मार्ग खोलती है जो बाहरी प्रभावों के प्रति संवेदनशीलता को क्वांटम गुणों की स्थिरता के साथ जोड़ते हैं। ऐसे यौगिक क्वांटम कंप्यूटरों, परिशुद्धता संवेदकों और ऊर्जा-कुशल इलेक्ट्रॉनिकी में काम आ सकते हैं।
शोधकर्ता अब जाँच रहे हैं कि क्या ऐसी प्रावस्था अन्य यौगिकों में भी पाई जाती है।


