❓ प्रश्न:
तलाक का बच्चों पर क्या असर होता है?
❗️ ली (lee) का उत्तर:
तलाक अपने आप में कोई स्वतंत्र सत्ता नहीं है जिसके अपने कोई पूर्व-निर्धारित अर्थ हों। यह केवल एक प्रक्रिया मात्र है। यदि आप इस प्रक्रिया का उपयोग दूर रहकर एक सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने के लिए करते हैं, तो आप वास्तव में सद्भाव पैदा कर रहे होते हैं, जो साथ रहने के दौरान होने वाले कलह से कहीं बेहतर है।
इतना ही नहीं, जो लोग "बच्चों की खातिर" साथ रहने का फैसला करते हैं, वे अक्सर बाद में बच्चों को यह उलाहना देते हैं कि उन्होंने "उनके भले के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी।" सच तो यह है कि बच्चों को इसकी कोई परवाह नहीं होती। वे या तो आपके साथ वास्तविक शांति में रहे होते हैं या फिर उन्होंने आपके दिखावे को करीब से देखा होता है। आपका यह बलिदान उनके मन में आपके प्रति घृणा या सहानुभूति तो पैदा कर सकता है, लेकिन वे निश्चित रूप से आपके फैसलों की जिम्मेदारी अपने सिर नहीं लेना चाहेंगे।
अपनी भावनाओं का बोझ दूसरों पर डालना सही नहीं है। एक व्यक्ति जो कुछ भी महसूस करता है, वही उसके जीवन की वर्तमान सच्चाई होती है।
सत्ता और धर्म कभी भी तलाक को प्रोत्साहित नहीं करते, क्योंकि तब लोगों पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। यहीं से "ईश्वरीय नियमों के उल्लंघन" जैसी पौराणिक कहानियां जन्म लेती हैं।
मगर "ईश्वरीय नियम" केवल एक ही है - जो आप महसूस करते हैं, वही आपका अनुभव बनता है। मिनटों, घंटों, दिनों और सालों के इन्हीं अहसासों से पूरी जिंदगी की बुनावट होती है। हर पल अपने प्रति ईमानदार रहें - आप कभी गलती नहीं करेंगे।




