NVIDIA ने हाल ही में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणालियों में क्वांटम त्रुटि सुधार (क्वांटम एरर करेक्शन) की चुनौतियों से निपटने के लिए क्लासिकल इजिंग मॉडल पर आधारित ओपन-सोर्स मॉडल पेश किए हैं।
सरफेस कोड या टोपोलॉजिकल क्वांटम कोड जैसी पारंपरिक विधियों के विपरीत, ये मॉडल बड़े न्यूरल नेटवर्क की ट्रेनिंग के दौरान पैदा होने वाले शोर (नॉइज) को समझने और उसे ठीक करने के लिए स्पिन कॉन्फ़िगरेशन की ऊर्जा का उपयोग करते हैं।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह दृष्टिकोण पिछले ह्यूरिस्टिक समाधानों की तुलना में त्रुटि सुधार की गणना लागत को 30-40 प्रतिशत तक कम करने में सक्षम बनाता है।
तकनीकी रूप से, यहाँ इजिंग मॉडल को एक ग्राफ संरचना के रूप में लागू किया गया है, जहाँ नोड्स क्वांटम बिट्स या न्यूरल नेटवर्क के मापदंडों को दर्शाते हैं और उनके बीच होने वाली अंतःक्रियाओं को हैमिल्टनियन के माध्यम से परिभाषित किया गया है।
इसकी ट्रेनिंग का मुख्य लक्ष्य शोर की स्थिति में सिस्टम की ऊर्जा को न्यूनतम करना है, जो काफी हद तक एनीलिंग प्रक्रिया के समान है। NVIDIA ने GPU पर इन प्रयोगों को दोहराने के लिए ओपन वेट्स और कोड तो उपलब्ध कराए हैं, लेकिन सत्यापन में इस्तेमाल किए गए सिंथेटिक नॉइज डेटा को बनाने के सटीक विवरण साझा नहीं किए हैं।
यह कार्यप्रणाली परिणामों की हस्तांतरणीयता (ट्रांसफेरेबिलिटी) को लेकर कुछ सवाल खड़े करती है। इसके परीक्षण मुख्य रूप से छोटे आकार के सिम्युलेटेड क्वांटम सर्किट पर किए गए थे, न कि वास्तविक क्वांटम हार्डवेयर पर। ऐसे में यह सवाल अभी बना हुआ है कि आधुनिक क्वांटम प्रोसेसरों की विशिष्ट सहसंबंधित त्रुटियों को ये मॉडल कितनी प्रभावी ढंग से संभाल पाएंगे।
गूगल क्वांटम AI के 2023 के शोध की तुलना में, जहाँ लगभग 1 प्रतिशत के एरर थ्रेशोल्ड वाले सरफेस कोड का उपयोग हुआ था, NVIDIA का दृष्टिकोण हाइब्रिड क्लासिकल-क्वांटम ऑप्टिमाइज़ेशन पर जोर देता है, जो हजारों क्यूबिट्स तक विस्तार के लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है।
अनुसंधान के क्षेत्र में यह प्रगति क्वांटम कंप्यूटिंग और बड़े पैमाने के मशीन लर्निंग समुदायों को एक-दूसरे के करीब लाती है। पूर्व में Xanadu और Rigetti द्वारा क्वांटम मशीन लर्निंग पर किए गए कार्यों में ऐसे विचार मिलते थे, लेकिन NVIDIA पहली ऐसी कंपनी है जिसने PyTorch जैसे फ्रेमवर्क में एकीकरण के लिए पूरी तरह से ओपन वेट्स और उपकरण प्रदान किए हैं।
इस तरह का कदम स्वतंत्र समूहों के प्रयोगों को गति दे सकता है और AI के लिए फॉल्ट-टोलरेंट क्वांटम एल्गोरिदम के क्षेत्र में प्राथमिकताओं को नई दिशा दे सकता है।
उद्योग जगत के लिए इसका अर्थ है कि एरर करेक्शन की समस्याओं को अब न केवल विशिष्ट क्वांटम हार्डवेयर पर, बल्कि सांख्यिकीय भौतिकी के परखे हुए तरीकों से क्लासिकल एक्सीलरेटर पर भी हल किया जा सकता है। वहीं, यह अभी भी अस्पष्ट है कि बिना अतिरिक्त अंशांकन (कैलिब्रेशन) के वास्तविक क्वांटम शोर के बीच ये मॉडल कैसा प्रदर्शन करेंगे।
आगामी शोध कार्यों में संभवतः वास्तविक क्वांटम उपकरणों पर इसकी सुवाह्यता का परीक्षण किया जाएगा और पारंपरिक डिकोडर्स के साथ ऊर्जा की खपत का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा।
निष्कर्षतः, NVIDIA द्वारा इजिंग मॉडल्स को ओपन-सोर्स करना क्वांटम-प्रतिरोधी AI के क्षेत्र में पुनरुत्पादकता (रिप्रोड्यूसिबिलिटी) का एक नया मानक तय करता है और अधिक कुशल हाइब्रिड आर्किटेक्चर के द्वार खोलता है।



