जुलाई 2026 के अंत में, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के भीतर एक ऐसी महत्वपूर्ण घटना घटी जिसने न केवल अज्ञात विसंगतिपूर्ण घटनाओं (UAP) के प्रति उत्साही लोगों का, बल्कि वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय का भी ध्यान आकर्षित किया। राष्ट्रीय खुफिया विभाग के प्रधान उप निदेशक, आरोन लुकास ने एक ऐतिहासिक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से कहा गया कि राष्ट्रपति या उनके अधिकृत प्रतिनिधियों को UAP के बारे में जानकारी देने से रोकने वाले पिछले सभी गैर-प्रकटीकरण समझौते, शपथ और कानूनी प्रतिबद्धताएं अब पूरी तरह से समाप्त कर दी गई हैं। अब सभी वर्तमान कर्मचारियों, पूर्व अधिकारियों और ठेकेदारों के लिए यह अनिवार्य है कि वे ऐसी किसी भी जानकारी को पेंटागन के ऑल-डोमेन एनोमली रेजोल्यूशन ऑफिस (AARO) या पर्स्यू (PURSUE - प्रेसिडेंशियल अनसीलिंग एंड रिपोर्टिंग सिस्टम फॉर UAP एनकाउंटर्स) टास्क फोर्स के साथ साझा करें।
इस सरकारी निर्देश के जारी होने के तुरंत बाद, कांग्रेस सदस्य एरिक बर्लेसन ने इसके कार्यान्वयन के संबंध में प्रारंभिक दिशा-निर्देश प्रकाशित किए और प्रभावित व्यक्तियों से सहायता के लिए उनके कार्यालय से संपर्क करने का आग्रह किया। हार्वर्ड के प्रसिद्ध खगोल भौतिकीविद् एवी लोएब, जो UAP विज्ञान सलाहकार परिषद का नेतृत्व करते हैं, ने इस पर बहुत ही सकारात्मक और सीधी प्रतिक्रिया दी। अपने विभिन्न लेखों और वीडियो संदेशों में, उन्होंने उल्लेख किया कि UAP के बारे में जानकारी का प्रकटीकरण अब केवल एक विकल्प नहीं रह गया है। लोएब का तर्क है कि यदि हमारे ब्रह्मांडीय 'पड़ोसी' वास्तव में मौजूद हैं, तो वे केवल इसलिए ओझल नहीं हो जाएंगे क्योंकि डेटा को गोपनीय रखा गया है। उनके अनुसार, मुख्य प्रश्न अभी भी वही है: क्या हमारे पास अलौकिक तकनीक का कोई ठोस और अकाट्य प्रमाण है? मानवता का हर सदस्य इस सच्चाई को जानने का हकदार है।
Today, I'm releasing preliminary implementation guidance shared by the Trump administration regarding President Trump's UAP NDA directive. If you have questions about the directive, or believe it may apply to you, I encourage you to contact my office or another Member of
एवी लोएब इस ज्ञापन में छिपे एक विशेष विवरण को लेकर काफी उत्सुक थे। उन्होंने यह सवाल उठाया कि आखिर ऐसे समझौते अस्तित्व में ही क्यों थे जो विशेष रूप से देश के राष्ट्रपति को UAP से जुड़ी जानकारी देने से रोकते थे? सामान्य सुरक्षा वर्गीकरण प्रणाली में, राष्ट्र का प्रमुख सबसे ऊपर होता है और सभी गोपनीय अधिकार उन्हीं से प्रवाहित होते हैं। ऐसे में कमांडर-इन-चीफ की पहुंच को रोकने वाला कोई भी समझौता अत्यंत असामान्य प्रतीत होता है। इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं: जैसे कि ये अत्यंत विशिष्ट 'स्पेशल-एक्सेस प्रोग्राम' हो सकते हैं जिनकी पहुंच सूची बहुत सीमित होती है; या फिर ठेकेदारों के साथ किए गए कॉर्पोरेट समझौते जिनमें सरकारी वर्गीकरण के बजाय व्यापारिक गोपनीयता शामिल हो सकती है; या यह केवल पुरानी नौकरशाही की सुस्ती का परिणाम हो सकता है, जहां पिछली सरकारों के समय बनाई गई सूचियों को कभी अपडेट ही नहीं किया गया।
लोएब के विश्लेषण के अनुसार, इन कड़े प्रतिबंधों के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक छिपे हो सकते हैं। इसमें ऐसी गैर-मानवीय सामग्री और प्रौद्योगिकियां शामिल हो सकती हैं जिनकी उड़ान भरने की विशेषताएं वर्तमान विज्ञान की समझ से परे हैं। इसके अलावा, इसमें अमेरिका के उन उन्नत सेंसरों का डेटा भी हो सकता है, जिनके सार्वजनिक होने से देश की खुफिया क्षमताओं का खुलासा होने का जोखिम हो। या फिर इसमें यह जानकारी भी हो सकती है कि अन्य विदेशी राष्ट्र इन अज्ञात घटनाओं से निपटने के लिए किस तरह की रणनीतियां अपना रहे हैं। यह नया ज्ञापन इन सभी कानूनी बाधाओं को प्रभावी ढंग से हटाता है और सारी जानकारी को पर्स्यू (PURSUE) समूह के अधिकार क्षेत्र में समेकित करता है।
प्रोफेसर लोएब ने इस बात पर विशेष बल दिया कि उनकी सलाहकार परिषद इस नई प्रक्रिया के माध्यम से सामने आने वाले किसी भी डेटा या भौतिक सामग्री का वैज्ञानिक विश्लेषण करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन विश्लेषणों के परिणामों को सार्वजनिक करने की योजना है। उनके अनुसार, वास्तविक वैज्ञानिक साक्ष्यों को कोरी अटकलों और अफवाहों से अलग करने का यही एकमात्र विश्वसनीय तरीका है। इससे पहले डेविड ग्रुश, लुइस एलिज़ोंडो और कई अन्य गवाहों द्वारा दिए गए बयान अक्सर गैर-प्रकटीकरण समझौतों की कानूनी दीवार के कारण आगे नहीं बढ़ पाते थे। लेकिन अब, उस बाधा को औपचारिक रूप से हटा दिया गया है, जिससे पारदर्शिता का मार्ग प्रशस्त हुआ है और गवाहों को सुरक्षा मिली है।
यह घटनाक्रम राष्ट्रपति द्वारा पारदर्शिता बढ़ाने के लिए दिए गए निर्देशों के बाद एक अत्यंत तार्किक और आवश्यक कदम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि यह ज्ञापन तत्काल किसी बड़े रहस्योद्घाटन की गारंटी नहीं देता, लेकिन यह तथ्य-जांच की प्रक्रिया में आने वाली सबसे पुरानी और सबसे जिद्दी बाधाओं में से एक को निश्चित रूप से समाप्त कर देता है। जैसा कि एवी लोएब अक्सर कहते हैं, वैज्ञानिक सत्यापन ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे मानवता यह समझ पाएगी कि वह वास्तव में किस तरह की अज्ञात घटनाओं या शक्तियों का सामना कर रही है। यह कदम भविष्य में अंतरिक्ष अनुसंधान और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत कर सकता है और दुनिया के सामने छिपे हुए तथ्यों को लाने में मदद करेगा।


